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पटना पुलिस सेक्स से कुंठित

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पटना पुलिस सेक्स से कुंठित आजकल पटना पुलिस का एक हीं काम रह गया है , वह है साईबर कैफ़े से लेकर पार्कों तक में यह देखना की कोई नवजवान जोडा सेक्स तो नही कर रहा है । एक पुलिस अधिकारी है , सिटी एस पी शिवदीप लांडे , उनका यह प्रिय शगल है , अपराध रोकने की जगह , सेक्स करनेवाले जोडे की तलाश करना, उन लडकों और लडकियों को गिरफ़्तार कर के उनकी तस्वीर अखबार में छ्पवाना और फ़िर खुद को समाज का नैतिक ठेकेदार बनकर लडके और लडकियों को उनके अभिभावक के सुपुर्द करना। पटना पुलिस का यह काम न सिर्फ़ अनैतिक है , बल्कि इससे भारत के संविधान द्वारा प्रदत निजता के अधिकार का उल्लंघन होता है । दिल्ली में एक मकान से आठ – दस जोडे पकडे गये थें , सेक्स करते हुये , मुकदमा चला, न्यायालय ने उस केस में स्पष्ट: रुप से कहा कि कोई भी व्यक्ति अगर बालिग है तो किसी के भी साथ सेक्स करने के लिये स्वतंत्र है । जबतक कोई अश्लील हरकत न हो , तबतक. सेक्स करनेवाले जोडों ढुंढ – ढुढ कर कैफ़े से और होटलों से पकडना स्वंय संविधान का उलंघन है । पटना पुलिस के द्वारा रेड से इतनी बात तो साफ़ हो चुकी है कि अधिकांश पकडे गये लडके और लडकियां कालेज के छात्र ...

पुनीत खंडेलिया ने क्यों छोडा हिन्दुस्तान?

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हिन्दुस्तान पटना में कभी जीएम, विज्ञापन के रुप में कार्यरत और काम के प्रति काफी मेहनती माने जाने वाले पुनीत खंडेलिया ने आखिर हिन्दुस्तान को छोड़कर प्रभात खबर क्यों ज्वाइन किया? यह जगजाहिर है कि पुनीत हिन्दुस्तान में विज्ञापन विभाग की रीढ़ माने जाते थे। पुनीत ने हिन्दुस्तान क्यों छोड़ा इसे जानकर हर कोई दांतों तले उंगली दबा रहा हैं। मामला तीन साल पुराना है हिन्दुस्तान ने पटना के गांधी मैदान में डा. पलास सेन के ग्रुप 'इफोरिया' नाम से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कराया। इस आयोजन के कुछ दिन पूर्व ही गांधी मैदान में ही 'महुआ' ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें काफी भगदड़ मची थी। महुआ के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए हिन्दुस्तान ने अपने कार्यक्रम में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम का ध्यान रखा। हिन्दुस्तान के संपादक ने कई अपने कई पत्रकारों को इसके लिए दबाव दिया कि वो पुलिस के आलाधिकारियों से सुरक्षा इंतजाम के लिए बात करें पर चूकि उस वक्त झारखंड में विधान सभा चुनाव होने थे और बिहार पुलिस और बीएमपी की अच्छी खासी टुकड़ी को झारखंड जाना था इसलिए आलाधिकारियों ने फोर्स देने से मना कर...

लालू को झटका, शकील अहमद खान ने राजद से नाता तोडा

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लालू को झटका शकील अहमद खान ने राजद से नाता तोडा शकील अहमद खान राजद के वरीय नेता रहे हैं । राजद के शासन काल में मंत्री पद पर भी रह चुके हैं। गया जिले के निवासी शकील अहमद खान उच्च न्यायालय के अधिवक्ता भी हैं। लालू के काफ़ि नजदीक रहे शकील अहमद खान का वैसे समय में राजद से नाता तोडना, जब नीतीश सरकार कठघरे में है , उसके उपर जमीन आवंटन से लेकर अन्य अभियोग लग रहे हैं , निश्चित रुप से नीतीश के लिए राहत का काम करेगा। हालांकि इससे राजद के वोट बैंक पर कोई खास असर नही पडनेवाला । l लेकिन यह सोचनीय है कि आखिर कौन सा कारण है जिससे बाध्य हो कर शकील अहमद को राजद छोडना पडा। शकील अहमद से बहुत पहले हुई बिहार मीडिया के संपादक मदन तिवारी के साथ बातचीत से यह अंदाज लग गया था कि वे राजद में लगातार हो रही उपेक्षा से क्षुब्ध हैं। शकील अहमद खान को अपने गर्ह क्षेत्र गया में भी राजद के बाहुबली विधायक सुरेन्द्र यादव के कारण राजनीतिक क्षति ्हो रही थी । सुरेन्द्र यादव ने हमेशा शकील अहमद के खिलाफ़ हीं चुनाव में काम किया था। लेकिन मात्र यह दो कारण नही हो सकते पार्टी से अलग होने का। विगत विधानसभा चुनाव में हुई हार से लालू ...

अफ़गानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी पाकिस्तान के लिए खतरा

अफ़गानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी पाकिस्तान के लिए खतरा अफ़गानिस्तान से अमेरिकी सेना के वापसी के कारण पाकिस्तान के कबिलाई इलाकों में आतकवाद की घटनाओं में वर्द्धि होने की संभावना बढ गई है । पहले भी भौगोलिक समरुपता के कारण अफ़गानिस्तान के आतंकवादी गुटों के लिए पाकिस्तान के कबिलाई इलाके से अपने काम को अंजाम देना या मुश्किलों में शरण लेना आसान होता था । अब जब अमेरिकी सेना की वापसी हो जायेगी तो आतंकवादी गुटो के लिये उन क्षेत्रो से अपनी आतंकवादी कार्रवाई को अंजाम देना ज्यादा आसान होगा। अफ़गानिस्तान से अमेरिका की वापसी , पाकिस्तान के लिये सबसे ज्यादा चिंता का विषय है । टिप्पणी के साथ अपना ई मेल दे जिस पर हम आपको जवाब दे सकें

अमेरिका चाहता है भारत को बली का बकरा बनाना

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अमेरिका चाहता है भारत को बली का बकरा बनाना भारत के गोर्बाचोव न बन जायें मनमोहन हिलेरी क्लिंगटन ओबामा का संदेश लेकर आई हैं , अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ़ जंग में हमारे साथ है । न्यूक्लियर डील को लागू करने के लिये अमेरिका प्रतिबद्ध है । यानी चिंता करने की जरुरत नही है । दुनिया का सबसे बडा दबंग राष्ट्र हमारे साथ है , यह दिगर बात है कि कभी यह हमारे खिलाफ़ पाकिस्तान को युद्ध मे मदद करता था , गलती अमेरिका की भी नही थी , हम रुस के साथ थें जिसे अमेरिका पसंद नही करता है । फ़िर दुनिया के इस दबंग ने कम से कम हमारी स्थिति अफ़गान जैसी तो नही की। अब यह अलग बात है कि हमसे न्यूक्लियर समझौता , आतंकवाद के खिलाफ़ जंग में साथ का वादा लेकिन युद्धक विमान पाकिस्तान को। हमारी कोई लडाई किसी से नही है , न तो अल कायदा से न किसी अन्य आतंकवादी संगठन से । हम सक्षम हैं अपनी लडाई लडने में और आतंकवाद को प्रश्रय देनेवाले मुल्कों से निपटने में। तब प्रश्न उठता है रुकावट कहा है , जब हम सक्षम हीं है । रुकावट है अमेरिका , काश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ़ कुछ नही कर सकते , मानवाधिकार की बात है , भले कश्मीर की हिंदु आबादी को घाटी छोड...

देते हैं गर्दन में हाथ डाल निकालने की धमकी

पटना के एक बड़े हिन्दी अखबार में काम करने वाले पत्रकार इन दिनों बेबसी का घूट पीकर काम कर रहे हैं। कारण उनके ब्यूरो चीफ की तुगलकी अदा है। इसी अखबार के एक दूसरे एडीशन में कभी संपादक रहे इस ‘बंध’ को डिमोशन देकर उन्हें पटना बुला लिया गया और ब्यूरो चीफ की उस कुर्सी पर बैठा दिया गया जो पूर्व में एक कद्दावर ब्यूरो चीफ के रिजाइन देने से खाली पड़ा था। पर डिमोशन होने के बावजूद पटना ज्वाइन करने के कुछ दिन बाद से ही इस बंधु ने बेहयायी की सारी हदें पार कर अपने जलवे दिखाने शुरु कर दिए। कोई दिन ऐसा नहीं जब ब्यूरो और सिटी डेस्क पर काम करने वााला कोई पत्रकार ब्यूरो चीफ से गालियां नहीं सुनता हो। अगर कोई पत्रकार उन्हें देखकर प्रणाम न करने और कुर्सी से खड़ा न होने की भूल करता है तो तुरंत उसे गर्दन में हाथ डालकर बाहर का रास्ता दिख देने की धमकी दी जाती है। खुद तो अनुभवहीन हैं पर ‘राजदरबार’ से ताल्लुक रखने वाले इस ब्यूरो चीफ पर अखबार का प्रबंधन भी मेहरबान रहता है। यहां तक की इस ब्यूरो चीफ से इस अखबार के संपादक भी घबराते हैं और कई अवसरों पर तो संपादक को इस ब्यूरो चीफ के पीछे खड़ा देखा गया है। ब्ूरो चीफ की करतूतो...

बिहार के शिंखडी पत्रकार

बिहार के शिंखडी पत्रकार बिहार में पत्रकारिता के स्तर की बात करना बेमानी है , हां कौन कितना बडा चमचा है यह न सिर्फ़ चर्चा का विषय रहता है बल्कि इसके लिये पटना के पत्रकारों में होड लगी रहती है । जमीन आवंटन घोटाले के बारे में अखबारों में जो छप रहा है , वह देखकर लगता है कि अखबार इस घोटाले की सच्चाई की तह तक जाने के वजाय नीतीश के पक्ष में दलीलें पेश करने और घोटाले से घिरे लोगों को निर्दोष साबित करने में ्लगे हैं। अगर चवन्नी छाप पत्रकार यह सब करते तो बहुत आश्चर्य नही होता , क्योंकि वैसे पत्रकार चमचागिरी से हीं आगे बढे हैं। उस तरह के पत्रकारों का उद्देश्य भी येन केन प्रकरेण पैसे कमाना हीं रहा है , इसलिये अपना केबुल चैनल चलाने से लेकर अखबार की फ़्रंचाईज लेनेतक का काम ये पत्रकार करते हैं । उस तरह के पत्रकारों के नाम का उल्लेख करने का अर्थ है , वेश्या के बारे में लोगो को बताना की देखो यह वेश्या है । यहां हम जिक्र कर रहे हैं वैसे पत्रकारों के बारे में जिनका नाम कभी सम्मान के साथ अखबार की दुनिया में लिया जाता था। शुरुआत करते हैं , हिंदुस्तान के अक्कू श्रीवास्तव से अक्कू कार्यकारी संपादक हैं , इन्हे...