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पत्रकारों की मूर्खतापूर्ण हरकत

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पत्रकारों की मूर्खतापूर्ण हरकत सैयद मोहम्मद अहमद काजमी एक फ़्री लांस जर्नलिस्ट है। यह तेहरान रेडियो तथा टीवी के लिये कार्य करते   रहे   है . इजरायल के दूतावास की गाडी में हुये विस्फ़ोट के सिलसिले में काजमी को गिरफ़्तार किया गया है । काजमी खुद को निर्दोष बता रहे हैं। दिल्ली के कुछ पत्रकारों ने एक संगठन बनाकर काजमी की रिहाई की मांग की है । पत्रकार बडे चालू जीव होते हैं , इनके कमीनेपन को भापना कठिन है । काजमी की रिहाई के लिये तुरंत – फ़ुरंत में बनाये गये इस बैनर को इन्होनें नाम दिया है ANHAD   एक्ट नाउ फ़ार हारमोनी एंड डेमोक्रेसी। ये पत्रकार खुद को सिविल सोसायटी का प्रतिनिधि बताते हैं । यह सिविल सोसायटी क्या है तथा इसके प्रतिनिधि का चुनाव कैसे होता है यह एक रहस्मय प्रश्न है । रिहाई की मांग करनेवाले पत्रकारों में शामिल हैं मनीष सेठी , अध्यक्ष जामिया मिलिया टिचर्स सोलिडरिटी एसोसियेसन , शबनम हाशमी , सीमा मुस्तफ़ा , सुकुमार मुरलीधरन . । इन पत्रकारों का यह कहना है कि गिरफ़्तारी इजरायल और अमेरिका के दबाव में की गई है । सेठी को तो शाक मार गया है यह जानकर कि इजरायल के इंटेलिजेंस सर...

प्रभात खबर के हरवंश जी नीतीश के प्रचार प्रमुख

प्रभात खबर को बहुत पहले से मैं नीतीश कुमार का अखबार कहता आ रहा हूं , आज भडास फ़ार मीडिया पर एक लेख हरवंश जी का छपा है । उस लेख पर पाठकों की प्रतिक्रिया किसी भी पत्रकार के लिये शर्मिंदगी की बात है लेकिन हरवंश जी को असर नही पडेगा , कारण है २५ सालललललललललललल से ज्यादा दिनो से पत्रकारिता करने का अहम । खैर आप पढें , हमारे हरवंश जी की गाथा । खगड़िया के बहाने बिहार : गुंडा कांड से विकास कथा तक Details Category: इवेंट , पावर-पुलिस , न्यूज-व्यूज , चर्चा-चिट्ठी... Published on Tuesday, 03 January 2012 06:32 Written by हरिवंश कुछ जगहें जेहन में बस जाती हैं. उनकी स्मृति आते ही इतिहास , अतीत और पुरानी घटनाएं सजीव हो उठती हैं. वर्तमान को टटोलती , खंगालती और आंकती. कुछ इस तरह बिहार का खगड़िया जिला मेरी स्मृति में है. धर्मयुग , मुंबई ( 80 के दशक के पूर्वार्ध) , रविवार , कोलकाता ( 90 के दशक के उत्तरार्ध) और फ़िर प्रभात खबर (रांची , 2000 के बाद)...

दलाल राजदीप सरदेसाई ने किया भ्रष्ट मीडिया का बचाव

  यहां नीचे एक  लेख आइबीएन १८ के प्रधान संपादक राजदीप सरदेसाई का है। बडे हीं तार्किक ढंग से मीडिया पर लगे इस आरोप को कि अन्ना का आंदोलन मीडिया की देन है , राजदीप ने नकारने की कोशिश की है । बात वहीं तक रहती तो कोई अंतर नही पडता , लेकिन उससे भी आगे बढकर राजदीप ने अन्ना का गुणगान फ़िर शुरु कर दिया है । पत्रकार का असली चेहरा उसकी लेखनी में झलकता है ।  मीडिया के क्षेत्र में आई गिरावट के लिये अगर दस पत्रकारों को दोषी माना जाय तो उनमें से राजदीप भी एक है । प्रभु चावला , बरखा दत , आशुतोष और रवीश जैसे लोगों का एक ग्रुप है। मीडिया को मैनेज करने के लिये इन सबको मैनेज करना पडता है । ये दलाल हैं। प्रभु चावला तो सीधी बात के नाम पर टेढी बात  करते करते अपने कमाल पुत्र अंकुर चावला के कारण टेढी  बात की जगह सिधी बात करने लगें । अब चावला टेढी बात कर भी नहीं सकते बडी मुश्किल से सीबीआई के चंगुल से बचे हैं और आजकल वनवास झेल रहे हैं। बरखा पत्रकारों के बीच आने की हिम्मत नहीं जूटा पाती है ।अन्ना की सभा में हीं अपमानित हो चुकी हैं , युवा...