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विनायक विजेता नही लेंगें पत्रकारिता से सन्यास

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विनायक विजेता नही लेंगें पत्रकारिता से सन्यास दावा हुआ सच साबित बिहार की पत्रकारिता के   हस्ताक्षर है विनायक विजेता जैसे पत्रकार । क्राईम रिपोर्टर के रुप मे स्थापित विनायक विजेता ने कुछ दिन पहले एक टिपण्णी फ़ेसबुक पर की थी । उन्होने एक पोस्टिंग की थी “  क्यों बैक फ़ुट      पर आ गये नितीश “ ।जैसा की फ़ेसबुक पर लोगो की एक आदत पड गई है , तथ्यो को न समझ कर कुछ मित्रो ने टिपण्णी की “ नीतीश किसी भी किमत पर नही करेंगे नियोजित शिक्षको से वार्ता “ हालांकि टिपण्णी करने वाले फ़ेसबुक यूजर नीतीश का गुस्से मे दिये उस बयान का जिसमे काले कपडे दिखाने और चप्पल फ़ेकने पर उन्होने कहा था कि वे अब नियोजित शिक्षको से कोई वार्ता नही करेंगे , पर विश्वास करते हुये प्रतिक्रिया व्यक्त की थी । । विनायक विजेता ने अपने स्वभाव के विपरित जाकर एक अप्रत्याशित घोषणा कर दी। क्या कहा था विनायक विजेता ने उसे हम यहा दे रहे । पहले उसे पढ ले तब बात को आगे बढायेंगें। “ कुछ मित्रों ने हमारे द्वारा फेसबुक पर डाले गए ‘ क्यों बैकफूट पर आ गए नीतीश कुमार ’ कॉलम पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर य...

साकेत गुप्ता हत्याकांड ; गिरफ्तारी या हत्या के भय से सरेंडर कर सकते हैं नामजद

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·         गिरफ्तारी या हत्या के भय से सरेंडर कर सकते हैं नामजद ·          प्रेम का हश्र देख आरोपितों में छाया है भय ·          सभी आरोपितो ने बंद कर रखे हैं अपने मोबाइल ·          डीजीपी खुद रख रहें हैं पूरे मामले पर नजर ·          प्रतिदिन की जांच प्रगति का ले रहे जायजा अभ्यानंद ·          अपने सहयोगी के   भाई की हत्या से दुखी हैं पुलिस प्रमुख यह समाचार विनायक विजेता के फ़ेसबुक से ली गई है ( विनायक विजेता ; बिहार के वरीय पत्रकार एवं क्राईम रिपोर्टिंग के क्षेत्र स्थापित नाम ) पटना: शराब व्यवसायी साकेत गुप्ता की हत्या में आरोपित किए गए कथित शराब व्यवसायी और अन्य फरार अपराधी इस मामले में आरोपित प्रेम सिंह के हश्र को घ्यान में रख जल्द ही चुपके से न्यायालय में आत्मसमर्पण भी कर सकते हैं। फरार आरोपितो को जहां गिरफ्तारी पर पुलिस के ड...

साकेत-प्रेम हत्याकांड

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साकेत-प्रेम हत्याकांड ·          सम्पूर्ण प्रकरण का मास्टरमाइंड है प्रमोद यादव ·         साकेत की हत्या साजिश से अपरचित नहीं थे प्रेम ·         प्रमोद और प्रेम में थी गाढ़ी व्यवसायिक दोस्ती ·         साकेत के व्यवसायिक प्रतिद्वन्दी प्रेम भी थे पर्दे के पीछे ·         जल्द ही सामने आने वाला है सच , मुकेश महज मोह रा    यह रिपोर्ट विनायक विजेता के फ़ेसबुक से ली गई है , उनके फ़ेसबुक का लिंक है ( विनायक विजेता बिहार के वरीय पत्रकार  ;  क्राईम रिपोर्टिंग एवं खोजी पत्रकारिता में स्थापित नाम । बिहार के सभी  अखबारों के रिपोर्टर इनके आर्टिकल्स की नकल कर के तैयार करते हैं अपनी रिपोर्ट ) पटना: पहले शराब व्यवसायी साकेत गुप्ता की हत्या और उसके दो दिनों के बाद ही एक अन्य शराब व्यवसायी प्रेम सिंह की हत्या और इसके पीछे की साजिश का मास्टरमाइंड कोई दूसरा नहीं बल्कि...

साकेत हत्याकांड : प्रेम के मोबाइल पर लास्ट कॉल डिप्टी कलेक्टर का

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साकेत हत्याकांड : प्रेम के मोबाइल पर लास्ट कॉल डिप्टी कलेक्टर का                        कुमार मंगलम हैं प्रेम के साले छपरा में हैं पदस्थापित              घटना के दिन उन्होंने कई बार बात की अपने बहनाई से              वकील से मिलने के लिए निकले थे प्रेम!                          सुलझने के बजाए उलझती जा रही है गुत्थी ( लेखक विनायक विजेता पटना के वरीय पत्रकार हैं और अपराध मामलों से संबंधित खबर पर इनकी गहरी पकड़ मानी जाती है ) पटना। पहले साकेत गुप्ता और उसके दो दिनों बाद शराब व्यवसायी प्रेम सिंह की हत्या मामले की गुत्थी सुलझने के बजाए उलझती जा रही है। गौरतलब है कि बीते   7 मई की सुबह कुम्हरार पार्क के बाहर राज्य के डीजी सह पुल...

शराब सिंडीकेट की वर्चस्वता में अभी और लाशें गिरने की आशंका

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·         शराब सिंडीकेट की वर्चस्वता में अभी और लाशें गिरने की आशंका ·         प्रेम सिंह मामले में कहीं अपराधी से पुलिस का स्पाई बना दबंग तो नहीं शामिल ·         लोहानीपुर का चर्चित अपराधी रहा है यह स्पाई सह साकेत गुप्ता का रिश्तेदार          विनायक विजेता ( पटना के वरीय पत्रकार ) शराब व्यवसाय में अचानक बढ़ी प्रतिस्पर्धा और शराब माफिया सिंडीकेट के बीच शुरु हुई खुनी वर्चस्वता की जंग ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि साकेत और प्रेम के बाद अब किसकी बारी है। साकेत गुपता हत्याकांड में आरोपित प्रेम सिंह नामक एक बड़े शराब व्यवसायी की लाश कुम्हरार गुमटी के पास रेल ट्रैक पर मिलने से मामले की गुत्थी और उलझती नजर आ रही है। हालांकि अबतक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि प्रेम सिंह की हत्या की गई या यह कोई दुर्घटना है पर पुलिस के अधिकारी भी दबी जुबान से इसे हत्या ही समझ रहें हैं। घटना के बाद घटनास्थल पर आए एफएसएल के विशेषज्ञों ने भी हत्या कहीं कर लाश को रे...

साकेत गुप्ता हत्याकांड: दर्ज प्राथमिकी में फंस सकते हैं पेंच

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साकेत गुप्ता हत्याकांड : दर्ज प्राथमिकी में फंस सकते हैं पेंच   पुलिसिया कार्यवाही   आई शक के दायरे में   साकेत की मां नहीं थी घटनास्थल पर   आखिर पुलिस के सामने क्या मजबूरी थी की मां को बनाया चश्मदीद घटना के वक्त साकेत की मां का घटनास्थल पर होने के कोई सबूत नहीं   पुलिस की गलती लाभ दिला सकती है ट्रायल के दौरान नामजद अभियुक्तों को   आलाधिकारियों द्वारा किसी मामले में सच्चाई और पारदर्शिता के दावे की खुली पोल   ऐसी प्राथमिकी पुलिस के लिए मजबूरी , अनुसंधान में आएगा सच: एसएसपी विनायक विजेता ( बिहार के वरीय पत्रकार ) डीजी सह पुलिस भवन निर्माण निगम के एमडी अशोक कुमार गुप्ता के ठेकेदार व शराब व्यवसरायी भाई साकेत कुमार गुप्ता की हत्या मामले में अगमकुआं थाने में दर्ज प्राथमिकी ही संदेह के घेरे में आ गई है। गौरतलब है कि साकेत गुप्ता की वृद्ध मां गीता देवी के फर्दबयान के आधार पर पुलिस ने गीता देवी को चश्मदीद बनाते हुए आठ लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है जिस प्राथमिकी में गीता देवी ने कहा है कि वह अपने बेटे के सरथ कुम्हरा...

साकेत गुप्ता हत्याकांड

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साकेत गुप्ता हत्याकांड नाजायज शराब बिक्री विवाद में हुई हत्या! हत्या की सुपारी देने वाला मुकेश है जहानाबाद का निवासी मखदुमपुर थाना के मनहत्ता बिगहा में है मुकेश का घर शराब व्यवसाय से पटना में बनायी लाखों की संपत्ति पुलिस ने आईओसी स्थित आवास पर की छापेमारी , पाया गया फरार विनायक विजेता ( Senior Journalist of Bihar ) पटना: डीजी सह पुलिस  भवन निर्माण निगम के निदेशक ए के गुप्ता के शराब व्यवसायी भाई साकेत गुप्ता की हत्या नाजायज शराब बिक्री विवाद के कारण की गई। साकेत की हत्या की सुपारी देने वाले जहानाबाद निवासी मुकेश के बारे में की गई छानबीन के बाद यह निष्कर्ष सामने आ रहा है। मूल रुप से जहानाबाद के मखदुमपुर थाना अंतर्गत जमनगंज पंचायत के मनहत्ता बिगहा गांव का रहने वाला मुकेश राजद शासन काल से ही शराब व्यवसाय से जुड़ा है। मुकेश खुद तो बढ़ई जाति का है पर उसका संबंध शराब के जायज नाजायज कारोबार से जुड़े एक जाति विशेष के ऐसे सिंडीकेट के साथ है जिसका पटना में प्रभुत्व माना जाता है। की गई छानबीन में यह बात सामने आ रही है कि मुकेश और उसका सिंडीकेट राजधानी और ...

पत्रकारों ने डीजी को बना डाला एडीजी

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पत्रकारों ने डीजी को बना डाला एडीजी पत्रकारिता में निष्पक्षता की बात तो अब गुजरे जमाने की चीज हो गई है। जैसे राजनीति में ईमानदारी । हो सकता है आनेवाले दिनों में निष्पक्ष एवं निर्भीक पत्रकारो को अजायबघर या मानसिक आरोग्यशाला में रखने की व्यवस्था सरकार करे। लेकिन उससे भी ज्यादा गिरावट आई है  पत्रकारों की क्वालिटी में। पढने -लिखने से मतलब नही बन बैठे पत्रकार । वैसे दोष उनका भी नही है । अब हजार रुपया , चार हजार रुपया में मजदूर तो महीने भर काम करेगा नही तो एक पढा  लिखा पत्रकार क्या करेगा। कट पेस्ट ने गदहो को भी पत्रकार बना दिया है। आज सुबह पटना में डीजी अशोक कुमार गुप्ता के भाई साकेत गुप्ता की हत्या अपराधियों ने कर दी ।हत्या का कारण रंगदारी मांगना बताया गया है । साकेत गुप्ता ठिकेदारी का काम करते थें । डीजी अशोक गुप्ता पुलिस भवन निर्माण निगम के चेयरमैन  सह प्रबंध निदेशक हैं तथा इसी वर्ष 31  अक्टूबर को रिटायर्ड होनेवाले हैं ।  विगत साल २०११ में १९७७ बैच के तीन आइपीएस अधिकारियों को  डीजी के पद पर  प्रोन्न...

सबसे बडा कौन ? बता रहे हैं विनायक विजेता

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पटना के जानेमाने पत्रकार हैं विनायक विजेता , यह उनका लिखा हुआ है जो फ़ेसबुक पर पोस्ट था । विनायक जी हालांकि शराब वगैरह जैसी चीजों से दूर रहते हैं, लेकिन यहां उन्होने शराब की महता बताई है । आप भी आनंद लें । विनायक विजेता : ·          मैं अपने एक पत्रकार मित्र के विशेष आग्रह पर शराब और शराबी की महत्ता से संबंधित यह कविता वॉल पर डाल रहा हूं। आशा है ‘न पीने वाले मित्र’ इसे अन्यथा नहीं लेंगे पर पीने वाले मित्र तो खुश जरुर होंगे। मित्रों के कमेंट से पता चलेगा कि कौन लेते है और कौन नहीं! एक शराबी रात में टुन्न होकर मयखाने से निकला। रास्ते में उसे एक पंडीत जी मंदिर से बाहर निकलते दिखे। शराबी सीधे पंडीत जी के पास पहुंचा और उनसे एक सवाल का जवाब देने का आग्रह करने लगा । पंडीत जी ने पीछा छुडाने के उद्देश्य से कहा कि पूछो शराबी : सबसे बडा कौन ? पंडीत : मंदिर बडा शराबी : मंदिर बडा  तो फ़िर धरती पर क्यों खडा   ? पंडीत : धरती बडी शराबी : धरती बडी तो शेषनाथ के माथे पर क्यों खडी ? पंडीत : शेषनाथ बडा शराबी ; शेषनाथ बडा तो फ़िर शंकर के गल...

हमने मजबूर कहारों पर ग़ज़ल लिखी है

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बिहार में पत्रकारिता जगत का शायद हीं कोई व्यक्ति हो जो विनायक विजेता को न जानता हो । अंतर हो सकता है समर्थक और विरोधी होने का । पत्रकारिता जगत का एक जाना पहचाना चेहरा , प्यार से मांगो तो जान हाजिर , लडोगे तो फ़ैसला तिहाड में । कभी – कभी उनसे मुलाकात हो जाया करती है । विजेता जी के साथ कभी आप ध्यान की अवस्था में बैठें , मजा आयेगा । उनकी  तुकबंदी कहें , कविता कहें या विचार ।   ।वह है “ सबसे बडा कौन “   । लिखते समय भी सबसे बडा कौन की पंक्तिया याद आ रही है और मन्द मन्द  मुसकुरा रहा हूं । एक गजल इन्होने  फ़ेसबुक पर पोस्ट की है । यहां उसे दे रहा हूं । आप तो हल छोड   के मंगरु उठाये हथियार के दर्द को बयां कर रहे हैं विजेता सर जी । मदन तिवारी   हमने गाँव के बेचारों पर ग़ज़ल लिखी है आपने सागर के उफनते हुए यौवन को सराहा हमने तो शांत किनारों पर ग़ज़ल लिखी है खा रहे नोच कर इंसान की बोटी जो आपने उन गुनाहगारों पर ग़ज़ल लिखी है जिनकी आदत है हँसीं जिस्म का सौदा करना आपने उनके इशारों पर ग़ज़ल लिखी है आपने उगते हुए सूरज को नमस्कार किया हमने ढलते...