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बस बहुत हुआ ,आओ अब लौट चले

बस बहुत हो गया, आओ अब लौट चलें हमें लौटना होगा। जमीन हमारी मां है। इसका उपयोग सदियों से अनाज उगाने के लिये हम करते आये हैं। उसी अनाज को दुबारा बीज के रूप में उपयोग करते हैं। बस हमें आज भी यही करने दिया जाय। मत लो हमारी जमीन। नहीं चाहिये यह विकास जहां हम मुर्दे बनकर रह गये हैं। जहां लाख रुपया हो तभी आपका बेटा पढ़ सकता है। दस लाख हो तो कोचिंग ले सकता है, आईआईटी की, आईएएस की। बस बहुत हुआ लौटा दो 1990 के पहले का देश। गरीब मर रहा है, आम आदमी चोर बन रहा है, भ्रष्ट बन रहा है, बेटे की शिक्षा के लिये, मकान के लिये, बेटी के दहेज के लिये, बस बहुत हुआ। बच्चों का बचपन खो गया, सुबह चार बजे उठते हैं, स्कूल जाना है, होम वर्क है, आखिर यह सब किस लिये? पढ़कर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नौकर बनने के लिये? अब नहीं सहा जाता। पढ़कर आता है बेटा, नौकरी की तलाश, अगर अमीर का बेटा है तो बडे़ कालेज से निकलेगा, इसलिये नहीं की बहुत तेज बुद्धि है। शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है। स्कूल या कालेज की पढ़ाई सिर्फ़ दिखाने भर को है। कोचिंग चाहिये, उसके लिये पैसा चाहिये। इंजीनियरिंग की कोचिंग करवानी है तो चल जाओ कोटा, डेढ-दो ...