Posts

Showing posts with the label america

विदेशी खुदरा निवेश यानी भ्रष्ट वाल मार्ट को न्योता

Image
विदेशी खुदरा निवेश यानी भ्रष्ट वाल मार्ट को न्योता केन्द्र की सरकार खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति प्रदान करने के लिये एडी – चोटी का जोर लगा रही है । खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश यानी दुनिया भर में दुकानों की श्रूंखला चलानेवाली कंपनियां जैसे अमेरिका की वाल - मार्ट , फ़्रांस की केरफ़ोर , जर्मनी की मेट्रो ए जी को न्योता देना ।  ये स्टोर नमक से लेकर आलू – प्याज , चावल – गेंहूं , दवा सबकुछ एक दुकान के अंदर हीं बेचेंगें । सरकार का तर्क है कि इन विदेशी दुकानों के खुलने से किसानों को उनकी उपज की अच्छी किमत मिलेगी , रोजगार के अवसर पैदा होंगें क्योंकि बिक्री की जानेवाली सामग्री की खरीद , संचयन से लेकर मालवाहन और बिक्री तक का काम ये कंपनियां स्वंय करेंगी जिसके लिये लाखों कर्मचारियों की जरुरत होगी । यह लोगों को स्तरीय सामग्री भी उपलब्ध करायेंगी । लेकिन खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश का जोरदार विरोध भी हो रहा है । विरोध करनेवालों के पास भी सशक्त तर्क मौजूद हैं । जैसे कंपनियों पर किसानों की निर्भरता बढेगी और सभी कंपनिया आपसे में मिलकर एक हीं एजेंसी से सामानों ...

जेल खोलो पैसे कमाओ

Image
जेल खोलो पैसे कमाओ दुनिया में पूंजीवाद का सबसे बडा उदाहरण हमेशा से अमेरिका रहा है । हमारे देश में एक कहावत है लहर गिनकर पैसा कमाना यानी जो भी काम सौंपा जायेगा उसमें भ्रष्ट तरीके से पैसा कमाने का रास्ता हम तलाश लेते हैं लेकिन अमेरिका में रास्ता तलाशने की आवश्यकता नही है । सरकार की नीतियां हीं मौका प्रदान करती हैं। बहुत कम लोगों को पता होगा कि अमेरिका में प्रायवेट जेले भी हैं जहां कैदियों को रखा जाता है और सरकार उन जेलों को कैदियों को रखने के एवज में पैसा देती है । बिहार मीडिया ने अपने एक लेख में इसे प्रकाशित किया था । अभी अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव होना है । इस चुनाव में गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में रहने वाले अप्रवासियों का मुद्दा गरमाया हुआ है । नाजायज रुप से अमेरिका में रहने वालों को गिरफ़्तार करना और वापस उनके देश भेजने के लिये कानून है । ओबामा के शासनकाल सबसे ज्यादा लोगों को नाजायज रुप से रहने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया । प्रत्येक दिन 33 हजार गैर अमेरिकन को गिरफ़्तार करके जेल में रखा जाता है । अमेरिका की सरकार को इस तरह के बंदियों को रखने में एक दिन में 55 लाख...

बलूचिस्तान की आजादी जरुरी है

Image
बलूचिस्तान की आजादी जरुरी है जैसे फ़िलस्तीन अपने लिये एक घर की लडाई लड रहा है ठिक उसी तरह पाकिस्तान – अफ़गानिस्तान – ईरान के बीच स्थित बलूचिस्तान भी अपने हक की लडाई लड रहा है । बलुचिस्तान को तीन हिस्सों में   बाटकर के तीनो देशो ने कब्जा जमा रखा है । इसके दक्षिण - पूर्वी हिस्से पर ईरान , दक्षिण  – पश्चमी हिस्से पर अफ़गानिस्तान और पश्चमी भाग पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है । सबसे बडा हिस्सा तकरीबन ४४ प्रतिशत पाकिस्तान के कब्जे मे है ।   १९४७ में जब पाकिस्तान आजाद हुआ , बलूचिस्तान एक स्वतंत्र राज्य था । पाकिस्तान की सेना ने हमला करके उस पर कब्जा जमा लिया लेकिन वहां की आवाम ने कभी भी पाकिस्तानी कब्जे को स्वीकार नही किया ।   वर्ष १९४८ से हीं वहां सशस्त्र विद्रोह हो रहा है। वहां के राजकुमार अब्दुल करीम खान के नेतर् ‍ त्व में विद्रोह की शुरुआत हुई थी और गोरिल्ला पद्धति से पाकिस्तानी सेना के खिलाफ़ सशस्त्र संघर्ष शुरु हुआ जो अबतक जारी है । १९५८ में इस सशस्त्र संघर्ष का नेतर् ‍ तव कर रहे नवाब नवरोज खान को उनके सहयोगियों के साथ गिरफ़्तार कर के जेल में डाल दिया गया और नवरो...

तबाही के रास्ते पर ईरान

Image
तबाही के रास्ते पर ईरान ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के टलने की कोई संभावना अब नहीं दिखती । ईरान अपने गुप्त परमाणु कार्यक्रमों को बंद नहीं करनेवाला और इजराइल कभी भी ईरान को परमाणु संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देगा । परमाणु संपन्न ईरान, इजराइल के अस्तित्व के लिये खतरा है । ईरान ने कभी भी इजराइल को मान्यता नही दी और हमेशा यह दुहराता रहा है कि येरुशलम को इजराइल से मुक्त करायेगा । लेबनान में हजीबुल्लह और गाजापट्टी में हमास को भी ईरान ने हमेशा मदद की है । इजरायल को पता है , अगर ईरान परमाणु बम का निर्माण कर लेता है तो उसका पहला निशाना इजराइल हीं होगा वैसे हालात के पैदा होने से बेहतर है पहले हीं हमला करके ईरान की परमाणु क्षमता को नष्ट कर देना । इस युद्ध का अंजाम भी सभी को पता है । ईरान में तबाही । हालांकि आबादी के हिसाब से ईरान , इजराइल से दस गुणा बडा है । जहां इजराइल की आबादी मात्र ७५ लाख है वहीं ईरान की सात करोड से उपर । ईरान के पास सैन्य हथियार भी इजरायल से बहुत अधिक हैं। लेकिन इन सबके बावजूद युद्ध की स्थिति में इजरायल का पलडा भारी रहेगा और ईरान बचाव की मुद्रा में नजर आयेगा यानी वह इजरायल ...

यह साला अमेरिका

यह साला अमेरिका है आप हम जब किसी व्यक्ति पर उसकी ओछी हरकत या कमीनेपन के कारण बहुत गुस्से में होते हैं   तो दो गाली का अक्सर प्रयोग करते हैं। हिंदीभाषी कहते हैं साला बहुत कमीना है और अंग्रेजी दां कहते हैं   he is  bastard . मैने उससे थोडा सम्मानजनक शब्द " यह साला अमेरिका " का इस्तेमाल किया है , मजबूरी है । अगर कडे शब्दों का इस्तेमाल अमेरिका के लिये करुंगा तो उसके नकशे  कदम पर चलने वाले ्कांग्रेस - भाजपा के लिये भी उसी तरह का सम्मानजनक शब्द का इस्तेमाल करना पडेगा । अब बुढे मनमोहन – मंटोक और अडवाणी – यशवंत सिंहा के लिये कठोर शब्द घातक हो सकते हैं । भारत में अक्सर नेता हार्ट अटैक से मरते हैं । मैं अपने सिर पे यह पाप नहीं लेना चाहता , इसलिये अपने बुजुर्ग नेताओं को ध्यान में रखते हुये अमेरिका के लिये मात्र साला शब्द का इस्तेमाल किया है । अब आप सोच रहे हैं कि अमेरिका को साला बोला क्यों ? अमेरिका पर गुस्साने का कारण क्या है ? मालदीव की घटना से आप सभी वाकिफ़ हैं । वहां के अपदस्थ राष्ट्रपति ने अभियोग लगाया था कि उन्हें वर्तमान राष्ट्रपति की सह पर हथियार का भय दिखाकर त...

दुनिया में सबसे ज्यादा कैदी अमेरिकी जेल में

Image
   दुनिया में सबसे ज्यादा कैदी अमेरिकी   जेल में एक लाख में ७४३ अमेरिकन जेल में दुनिया के पचीस प्रतिशत कैदी अमेरिकन जेलों में दुसरे नंबर पर रवांडा तिसरे पर रुस तथा चौथे पर चीन काले कैदियों   की संख्या आबादी के हिसाब से ज्यादा बुढे और बिमार से भरी पडी है अमेरिकन जेलें अमेरिका मे हैं प्रायवेट जेलें २२ लाख डालर  प्रायवेट जेले खर्च करती हैं  राजनीतिक दलों को चंदा देने में हर चमकने वाली चीज सोना नही होती है। भारत की सरकार को यह समझने की जरुरत है । विगत दो दशकों से देश अमेरिकन पूंजीवाद के जाल में फ़सता जा रहा है । कभी निरपेक्ष विदेश नीति की वकालत करनेवाला और गुटनिरपेक्ष दलों का नेता भारत आज छोटी – छोटी जरुरत के लिये अमेरिका का मुहताज हो चुका है । अपनी मर्जी से इरान से तेल नही खरीद सकता और इरान से तेल खरीदने के लिये अमेरिका का समर्थन सिरिया के मुद्दे पर करना पडा। यह है हमारी विदेश नीति।  प्रणव मुखर्जी जैसे नेता ने हुंकार भरते हुये दो दिन पहले कहा था कि भारत इरान से तेल खरीदना नहीं बंद करेगा । यह नही बता सकें कि भुगतान कैसे होगा । जब अमेरिका ने...

भारत संप्रभुता संपन्न राष्ट्र नही है

भारत संप्रभुता संपन्न राष्ट्र नही है पूंजीवाद को गले लगाने के पहले हमने यह भी नही सोचा कि अपने देश की संप्रभुता का क्या हश्र होगा। पूंजीवाद कुछ देशों के हाथ में अपनी अर्थ व्यवस्था को सौप देना था , यह एक प्रकार की आर्थिक गुलामी थी। आज इसका सर साफ़ दिखा। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध   लगाया है साथ हीं यह भी घोषणा की है कि जो राष्ट्र इरान के साथ व्यवसाय करेंगें उनके साथ भी अमेरिका के व्यवसायिक संबंध खत्म हो जायेगें। हम सस्ते तेल का आयात इरान से करते हैं । १२ प्रतिशत तेल इरान से आता है । अमेरिका की इस घोषणा के बाद भारत की सरकार अमेरिका के आगे गिडगिडा रही है , माई – बाप कुछ छूट दे दें। हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जायेगी । शर्म आ   रही है   खुद को इस देश का नागरिक कहने में । आज फ़िर सोचने का वक्त आ गया । देश के सभी राजनीतिक दल , पत्रकार एवं देशभक्तों के लिये यह परीक्षा की घडी है । हमारे भी पाकिस्तान के साथ गहरे मतभेद है लेकिन क्या हम अगर प्रतिबंध लगायेंगें तो अमेरिका पाकिस्तान से अपने संबंध समाप्त कर लेगा ? कभी हम गुटनिरपेक्ष आंदोलन के नेता थें , एक ऐसा भी वक्त आया था जब इसी ...

अमेरिकी छात्रों को जरुरत है जयप्रकाश नारायन की

Image
अमेरिकी छात्रों को जरुरत है जयप्रकाश नारायन की भारत का चोर मीडिया खामोश क्यों अमेरिकी साम्राज्यवाद की   मौत के लिये बस एक अदद लीडर की जरुरत है अक्युपाई वाल स्ट्रीट आंदोलन को दबाने की हर प्रयास असफ़ल होता दिख रहा है । यह स्व : स्फ़ुर्त आंदोलन है जो अमेरिका में बढती अमीरों और गरीबों के बीच खाई तथा बेरोजगारी के कारण पैदा हुये जन आक्रोश का परिणाम है । सरकार ने पुलिस के बल पर आंदोलनकारियों को हटा दिया , लेकिन न्यायालय ने आदेश जारी किया कि इस शांतिपूर्ण आंदोलन को जबर्दस्ती न कुचला जाये । अब यह आंदोलन अमेरिका के कालेजों तक फ़ैल चुका है । अमेरिका और सीआईए मीडिया को मैनेज कर के इस आंदोलन से संबंधित खबरों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। भार्त का बिका हुआ मीडिया तो सोया है। दुनिया की क्रांति के इतिहास की अभूतपूर्व घटना है यह । दुनिया की दिशा बदलनेवाले इस आंदोलन को सबसे बडा खतरा मीडिया से है । इस आंदोलन की सफ़लता का अर्थ है , पूंजीवाद...