चुरु मुर्गे की छ्ठ
सुबह जैसे हीं निंद खुली चुरु मुर्गे ने फ़टाफ़ट दडबे में बंद सभी मुर्गो को उठाना शुरु कर दिया , अरे कमबख्तों जल्दी उठो , ३ बजे गये हैं , बाग देनी है , पता है न आज छठ है , सभी मुर्गे भी फ़टाफ़ट उठ गयें। एक साथ बाग देने लगे। वाह क्या शमां बंधा था । अभी आधा घंटा भी नही हुआ था कि छठ के गीत मुर्गों को सुनाई पडने लगें। चुरु का चेहरा तो यूं चमकने लगा जैसे उसे अमरत्व का बरदान मिल गया हो । उधर उसकी पुरानी बीबी निकरी ने भी मुस्कुराते हुये बडे रोमांटिक अंदाज से उसे देखा तो चुरु भुनभुनाने लगा । यह मुरुख है , छठ मे ऐसे देखती है , चुरु कुछ बोला नही , उसको रुकु याद आ गया , जब से रुकु बिका है , चुरु निकरी को ज्यादा प्यार करता है , रुकु की उम्र हीं कितनी थी , खा खाकर मस्त हो गया था। सावन अभी खत्म हीं हुआ था , एक सुंदर सा जोडा आया , मोटरसायकिल से कल्लू की दुकान पर आया । आगे मर्द बैठा था पिछे गोद में एक बच्चे को लिय...