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आलोक धन्वा : एक कामलोलुप जनकवि – भाग १

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जनवादी कवि आलोक धन्वा ने क्रांति भट्ट उर्फ़ असीमा भट्ट से प्रेम विवाह किया था। असीमा के पिता सुरेश भट्ट साम्यवादी विचारधारा के क्रांतिकारी थें । जय प्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से जुडे सुरेश भट्ट बिहार के नवादा जिले के धनी परिवार के थें परन्तु दिल के किसी कोने में अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की भावना ने इन्हें क्रांतिकारी बना दिया । लालू, नीतीश , सुरेश भट्ट को गुरु कहा करते थें । जार्ज फ़र्नाडिस जैसा समाजवादी नेता भी सुरेश भट्ट का बहुत सम्मान करते थें । आज सुरेश भट्ट दिल्ली के एक ओल्ड एज होम में बिमार अवस्था में मौत का इंतजार कर रहे हैं । सुरेश भट्ट की पुत्री क्रांति भट्ट ने अपने से दुगुने उम्र के आलोक धन्वा से विवाह किया । आलोक धन्वा कहने को तो समाजवादी विचारधारा के होने का दिखावा करते थें लेकिन वास्तव में पुरुष प्रधान समाज के एक ऐसे व्यक्ति रहे जिन्होने प्रेम सिर्फ़ शरीर की चाह के लिये किया था । यहां हम क्रांति भट्ट की आत्मकथा के उन अंशो को प्रकाशित कर रहे हैं जिनमें क्रांति भट्ट ने आलोक धन्वा के असली चरित्र का चित्रण किया है । साल के शुरू में एक कविता आयी थी...

बिहार के राज्यपाल भ्रष्ट हैं

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बिहार के राज्यपाल भ्रष्ट हैं महामहिमों को जेल हो राज्यपालों के भ्रष्ट आचरण तथा पक्षपातपूर्ण हरकतों को देखते हुये इनके खिलाफ़ कडे कदम उठाने तथा इनकी हरकतों की न्यायिक जांच या निष्पक्ष एजेंसी से जांच की आवश्यकता महसुस की जाने लगी है । अभी कर्नाटक के महामहिम ने वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफ़ारिश करके राजनीतिक भुचाल पैदा कर दिया । देश की सर्वोच्चय न्यायपालिका बहुत पहले यह फ़ैसला दे चुकी है कि शक्ति परीक्षण हमेशा हाउस में होना चाहिये न कि राज्यपाल या राष्ट्र्पति भवन में लेकिन राजनीति के हाशिये पर सिमटे , राज्यपाल अपने अहंम की टुष्टी के लिये इस तरह की उलूल –जलूल हरकत करते रहते हैं। राज्यपालों के द्वारा इस तरह की हरकत का कारण है उनके लिये सजा का कोई प्रावधान का न होना । । न्यायालय ज्यादा से ज्यादा इनकी इस तरह की हरकतों को रद्द कर सकती है लेकिन मोटी चमडी वाले राजनेता से बने राज्यपालों को तो जूते- चप्पल तक खाने में भी अपमान नही महसुस होगा और अब उसकी जरुरत भी है । देश के संविधान के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति की एक अहम योग्यता है उस राज्य का नागरिक न होना , इस प्रावधान का कारण है पद की गरि...

गलत नियुक्ति के मामले में नीतीश कुमार शक के दायरे में

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गलत नियुक्ति के मामले में नीतीश कुमार शक के दायरे में आवेदक का पता है मुख्यमंत्री आवास , फ़र्जी कागजात पर हुई नियुक्ति । स्वच्छ छवि, सुशासन, पारदर्शिता का दावा करनेवाले नीतीश कुमार को समझना कठीन है । मुख्यमंत्री की मुस्कान मोनालिसा के मुस्कान की तरह रहस्मय है । इनकी कथनी और करनी का अंतर अब खुलकर लोगों के सामने आ रहा है । अभी एक ताजा मामला है कारा विभाग में ड्राईवर की नियुक्ति का । कारा विभाग ने ड्राईवर की नियुक्ति के लिये आवेदन आमंत्रित किया । आवेदक में एक नाम था परमानंद प्रसाद , पुत्र – सच्चिदानंद प्रसाद । इस आवेदक का पता में दर्ज है मुख्यमंत्री आवास , १ अण्णे मार्ग , बिहार पटना । चलिये यहां तक तो हम मान लेते हैं कि मुख्यमंत्री आवास में रहनेवाले किसी ्परमानंद नामक व्यक्ति ने आवेदन दिया होगा लेकिन इस पुरे खेल का सबसे मजेदार पहलु है , आवेदक के द्वारा दाखिल किया गया शैक्षिक प्रमाण पत्र तथा ड्राईविंग लायसेंस । ड्रायविंग लाईसेंस मे परमानंद की जन्मतिथी ०१।०३।१९७४ दर्ज है वहीं शैक्षिक प्रमाण पत्र में ३ जनवरी १९७६ है। यानी दोनो कागजात में से एक फ़र्जी है या शायद दोनो फ़र्जी है । परमानंद की न...

पति-पत्नी ने ट्रेन से कटकर आत्महत्या की

गया : मानपुर : आज दिनांक ३ मई को दोपहर में गया जिले के मानपुर रेलवे स्टेशन के निकट एक पति -पत्नीसे कटकर अपनी जान दे दी । अभी तक आत्मह्त्या के कारण का पता नहीं चल पाया है । रेल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है ।