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मोदी जवाब दो :RSS के फंडिंग और खर्च की जांच कराओ । है हिम्मत ?

सतही आरोप लगाकर ग्रीन पीस इंडिया का अकाउंट मोदी ने सस्पेंड कराया है क्योकि यह संस्था वन्य संरक्षण के लिए संघर्ष कर रही थी जिसके कारण मोदी के पूंजीवादी मित्रो को अपने प्रोजेक्ट के लिए जंगल को बर्बाद करने , आदिवासियों को उजाड़ने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था । खैर मेरा छोटा सा सवाल है । देशहित , राष्ट्रहित की बात करने वाले RSS ने अपना निबंधन किसी भी कानून के तहत क्यों नहीं करवाया है ? RSS के फंडिंग और उसके व्यय की जांच क्यों नहीं करवाती सरकार यानी मोदी ? ग्रीन पीस इंडिया के खाते को संस्पेंड करने का जो आधार है वह कितना सतही है यह निचे सरकार द्वारा जारी बुलेटिन को पढ़ने से स्पष्ट: हो जाएगा ।  Suspending the Registration of Greenpeace India Various Inputs were received that provisions of Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 are being violated by Greenpeace India Society, Chennai, Tamil Nadu. Standard questionnaire was served to the association. After receipt of reply to the standard questionnaire, as there were prima-facie violations of FCRA, 2010, an on-site inspection of ...

बस बहुत हुआ ,आओ अब लौट चले

बस बहुत हो गया, आओ अब लौट चलें हमें लौटना होगा। जमीन हमारी मां है। इसका उपयोग सदियों से अनाज उगाने के लिये हम करते आये हैं। उसी अनाज को दुबारा बीज के रूप में उपयोग करते हैं। बस हमें आज भी यही करने दिया जाय। मत लो हमारी जमीन। नहीं चाहिये यह विकास जहां हम मुर्दे बनकर रह गये हैं। जहां लाख रुपया हो तभी आपका बेटा पढ़ सकता है। दस लाख हो तो कोचिंग ले सकता है, आईआईटी की, आईएएस की। बस बहुत हुआ लौटा दो 1990 के पहले का देश। गरीब मर रहा है, आम आदमी चोर बन रहा है, भ्रष्ट बन रहा है, बेटे की शिक्षा के लिये, मकान के लिये, बेटी के दहेज के लिये, बस बहुत हुआ। बच्चों का बचपन खो गया, सुबह चार बजे उठते हैं, स्कूल जाना है, होम वर्क है, आखिर यह सब किस लिये? पढ़कर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नौकर बनने के लिये? अब नहीं सहा जाता। पढ़कर आता है बेटा, नौकरी की तलाश, अगर अमीर का बेटा है तो बडे़ कालेज से निकलेगा, इसलिये नहीं की बहुत तेज बुद्धि है। शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है। स्कूल या कालेज की पढ़ाई सिर्फ़ दिखाने भर को है। कोचिंग चाहिये, उसके लिये पैसा चाहिये। इंजीनियरिंग की कोचिंग करवानी है तो चल जाओ कोटा, डेढ-दो ...

सतालोलुप समाजवादियों का असली चेहरा

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सतालोलुप समाजवादियों का असली चेहरा राजनीति लगे रहने की चीज है । इसमे सफ़लता के लिये कुछ अनिवार्य गुण आवश्यक है । जबान से खुब सिद्धांत बखारिये लेकिन वक्त आये तो तलुये चाटकर भी जो मिले ले लिजिये । सिद्धांत को तो कांख में हर पल दबाये रखें । लालू , नीतीश , मुलायम, शरद  की तरह ।  दुसरा गुण बेशर्म होना है यानी न सिद्धांत बखारिये बल्कि जरुरत पर उसके लिये लडने को भी तैयार हो जाइये ।   जैसे लालू , मुलायम और शरद यादव ने किया था संसद में लोकपाल के लिये हो रही बहस के दरम्यान । ओमपुरी ने अन्ना के मंच से कह दिया सारे नेता चोर हैं , लग गया हमारे मुन्ना भाई लोगों को बुरा । किरन बेदी ने नकल उतारी शरद यादव की , लगे समाजवाद समझाने ।भगोडे शरद यादव , कहां गया आज तुम्हारा समाजवाद । गरीब घर की औलाद , संघर्ष कर के राजनीति मे जगह बनाई , पिछडो के लिये लडने वाले सिपाही हैं जैसे डायलाग मारे थे न शरद यादव जी । आज क्या हुआ ? चोर की तरह चेहरा क्यों छुपा लिया ? क्यों नही गये प्रणव मुख्रजी के नोमिनेशन में । दुसरे सिपाही हैं मुलायम सिंह यादव । देश मे परिवारवाद का विरोध करते थें ,...

एक क्रांतिकारी का अपहरण

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एक क्रांतिकारी का अपहरण छ्तीसगढ के सुकमा जिले के जिलाधिकारी एलेक्स पाल मेमन का अपहरण नक्सलवादियों ने कर लिया है । मेनन भले हीं आइ ए एस हों लेकिन उनकी विचारधारा हमेशा क्रांतिकारी रही है । समाज के वंचित तबको के लिये कार्य करना उनके लिये जनून की तरह था । जिलाधिकारी जैसे पद पर रहते हुये मोटरसायकील से आदिवासियों के बीच रात बिरात कभी भी चले जाना , उनकी समस्याओं को समझना और उसका निराकरण करने का प्रयास करना उनकी आदत थी। क्रांतिकारी सिर्फ़ वही नहीं होते जो हथियार उठाते हैं , बल्कि वैसे सारे लोग जो व्यवस्था की खामियों के खिलाफ़ किसी भी स्तर से संघर्ष कर रहे हों , वे क्रांतिकारी हैं। मेनन को मैं चे गुएवारा मानता हूं। भारत में साम्यवादी विचारधारावाले नेता जिनमें नक्सली भी शामिल हैं , उनमें से कितनों ने चे को पढा है या समझा है मुझे नही पता। साम्यवादी शायद मार्क्स से शुरु होकर माओ तक अटक जाते हैं। चे ने न सिर्फ़ अमेरिकी बल्कि सोवियत संघ के सा्म्राज्यवाद की   भी   आलोचना की है । फ़िदेल कास्त्रो को सता के शीर्ष पर स्थापित करने के बाद मंत्रीपद का त्याग करके क्रांतिकारियों के साथ रहकर चे...

साला तहनी के किसमतवे में मरेला लि्ख्खल हो

साला तहनी के किसमतवे में मरेला लि्ख्खल हो झंडा लेके घुमा हीं। लाल झंडा । हमनिये के गरियावा हीं । पैसा हइ तब्बे दुनिया हो। मरजइंब दवाइओ न मिलतो। हां बाबु ठिके बोला हूं। हमर बाजी मर गइले न । दु हजार रहतो हल त बच जइतो हल , का करिये बाबु सब पइसवा त तहनिये पास हइ । सरवा तबो नी समझा हीं। मर गइलो बप्पा न । देखली , हमर चचवा के , अमेरिका भेजलिये , पैसा हलो तबे न । तोर बप्पा दु हजार न हले त मर गइले । हां बाबु ठिके बोला हु , लेकिन बाबु तोरो चचवा कहा बचले , अमेरिका भेजलहु , दुइओ महिना न भैइले , मर गइले । हमर बजिया मरले बिना दवा के , तोर चचवा मरले दवा खाके । जेकरा मरेला हो उ मरते बाबु । तोरा लगा हो कि तु दवा करा रहलहु हे , एकरे से तोरा सनतोस होआ हो। जैसे हमनी के लगा हो दवाइया करतिये हल त बच जइतो हल। इ सब अपन अपन दिल के बहलावा हो बाबु । टिप्पणी के साथ अपना ई मेल दे जिस पर हम आपको जवाब दे सकें

मनमोहन , प्रणव और चिदंबरम बन गये हैं नासूर

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मनमोहन , प्रणव और चिदंबरम बन गये हैं नासूर देश आर्थिक दिवालियेपन के कगार पर विनियोग यानी देश की कंपनियों को बेच डाला ; अब देश को बेचने की तैयारी भाजपा की मंशा पर शक रिटेल सेक्टर में विदेशी पूंजी निवेश की अनुमति देने के बाद अब सरकार और उसके नुमायंदे विदेशी पूंजी निवेश के फ़ायदे गिना रहे हैं । पहले उन फ़ायदों को देखें जो देश के रक्षक गिना रहे हैं १। किसानों की उपज का ज्यादा मूल्य २ जनता को सस्ते दर पर सामान की उपलब्धता यानी महंगाई में कमी ३ स्टोरेज क्षमता का विकास ४ आवागमन की सुविधाओं का विकास यानी सडक से लेकर रेल यातायात तक की सुविधा ५ एक करोड रोजगार के अवसर सबसे पहले तो किसानो की उपज की किमत की बात करते हैं ; विदेशी रिटेल कंपनियों पर यह बाध्यता नही है कि किस दर पर किसानों से खरीद की जायेगी और अगर वही प्रोडक्ट दुसरे मुल्क में सस्ते दर पर उपलब्ध होगा तो कंपनिया कहां से खरीद करेंगी या नहीं । वर्तमान में बहुत सारे उत्पाद भारत से सस्ता चीन में उपलब्ध है । विदेशी कंपनियां , दुसरे मुल्क से सामान की खरीद करेंगी । अगर कच्चा माल देश के अंदर से खरीदने की बाध...

एफ़ डी आई : असली शोषक विदेशी निवेश के पक्ष में

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रिटेल क्षेत्र में विदेशी पूजी निवेश पर हो रहे विरोध से खफ़ा भारत के खरबपति भारत में मात्र आठ हजार लोगों के पास देश की कुल संपति का सतर प्रतिशत है और यही लोग इस देश की गरीबी , बेरोजगारी , महंगाइ के दोषी है । लोकसभा मे कायम गतिरोध से इन्हें गुस्सा आ रहा है और अब यह सामने आ गये हैं । इन खरबपतियों ने देश की आम जनता से आह्वान किया है कि वह रिटेल विदेशी निवेश के पक्ष मे आगे आये । सबसे पहले इन महानुभावों का परिचय और शोषण के बारे में बता हूं । एक प्रायवेट बैंक है एच एफ़ डी सी उसका चेयरमैन दीपक पारिख और और हिंदुस्तान लीवर की मालिक कंपनी यूनीलीवर का पूर्व अध्यक्ष अशोक गांगुली सबसे आगे हैं । एच डी एफ़ सी बैंक में इस देश की नब्बे प्रतिशत जनता प्रवेश करने की हिम्मत नही कर सकती है । आपके खाते में अगर पाच हजार रुपया से कम है तो यह बैंक १५०० रुपया कट लेगा कम राशी रखने के आरोप में इसके   क्रेडीट कार्ड की जांच करने पर पता ...