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यूपी में नीतीश : रुपम बलात्कार, फ़ारबिसगंज गोली कांड, बियाडा घोटाला, पंचम एनकाउंटर

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यूपी में नीतीश : रुपम बलात्कार , फ़ारबिसगंज गोली कांड , बियाडा घोटाला , पंचम एनकाउंटर का देना होगा जवाब यूपी के चुनाव में नीतीश कुमार   का दल जदयू भी अपनी औकात नापने की तैयारी कर चुका है । मामला कुछ और है , सामने २०१४ का लोकसभा चुनाव है। नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से उपर का पद पाने की चाह के लिये यह चुनाव एक पैमाना है। प्रधानमंत्री का सपना अखबार वाले नीतीश कुमार को दिखा रहे हैं। पीएम का पद आठ दस एमपी की बदौलत तो मिलने से रहा । रवीश कुमार , आशुतोष , राजदीप सरदेसाई और हरवंश ने इतना चढाया कि नीतीश को भी गलत फ़हमी हो गई है कि वे वाकई पीएम के योग्य हैं। खैर यूपी चुनाव औकात बता देगा। यूपी में कोई लालू नही है। और न हीं सवर्णों के नेता का अभाव है । अल्पसंख्यक के लिये ढेर सारे विकल्प हैं। दलित तो सता में ही है । यूपी में बिहार की तरह विकल्पहीनता की स्थिति नही है । बिहार में नीतीश विकल्पहीनता के विकल्प थें। वहां हालात उल्टे हैं , जैसे बिहार की जनता लालू से उनके काल में हुई गुंडागर्दी का जवाब मांगती थी , उसी तरह यूपी की जनता सवाल करेगी रुपम पाठक के बलात्कारियों के खिलाफ़ कार्रवाई न क...

प्रभात खबर गया की धोखाधडी

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प्रभात खबर की गैरकानूनी हरकत गया से प्रकाशन गैर कानूनी है अखबार के प्रकाशन का एक कानून है , उसे प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन आफ़ बुक्स एक्ट १८ ६७ के नाम से जाना जाता है । अखबार जहां से प्रकाशित होता है वहां के जिलाधिकारी या अनुमंडलाधिकारी के माध्यम से अखबार के नाम के रजिस्ट्रेशन के लिये एक आवेद्न महानिबंधक्   प्रेस दिल्ली को देना पडता है उसके बाद जब अखबार का नाम रजिस्टर्ड हो जाता है तब उसका प्रकाशन शुरु किया जाता है । अगर डेली अखबार है तो उसके प्रथम प्रकाशन के तीन माह के अंदर एक और आवेद्न तथा अखबार की एक प्रति निबंधक दिल्ली को भेजनी पडती है ।  प्रभात   खबर ने अपना प्रकाशन बिहार के गया जिले से शुरु किया है लेकिन अभीतक टाईटल भी रजिस्टर्ड नही करवाया है । टाईटिल कोड रजिस्टर्ड होने के बाद एक कोड नंबर मिलता है । उस कोड नंबर का उल्लेख अपने अखबार की घोषणा में हर हालत  में होना चाहिये । प्रखात खबर गया इस नियम का पालन नहीं करता है । सरकारी विग्यापन ...