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मैं हूं उनके साथ खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़...

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मैं हूं उनके साथ खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़... धीरज भारद्वाज किसी ने मुझसे पूछा , " क्या आपको इंडिया टीवी के संपादक विनोद कापड़ी से कोई निजी दुश्मनी है जो आप उनके खिलाफ़ अपने पोर्टल ' मीडिया दरबार ' पर अभियान चला रहे हैं और अपने साथी पोर्टल ' मीडिया खबर ' के संचालक पुष्कर पुष्प को दोषी ठहरा रहे हैं ?" तो मैं आवाक रह गया। मैंने उन्हें फ़ौरन जवाब दिया कि अगर विनोद कापड़ी और यशवंत के बीच मुझे किसी को चुनना होगा तो मैं बेशक यशवंत को चुनुंगा क्योंकि मैं कोई चोरी करके ' ब्लैकमेल ' होने वाले की जगह ' ब्लैकमेलर ' बनने वाले को ज्यादा पसंद करता हूं , लेकिन इसके लिए पुष्कर , अविनाश या संजय तिवारी जैसे सहयोगियों को दोषी ठहराने की मूर्खता मैं नहीं करूंगा , वो भी ऐसे वक्त पर जब हम सबको एक होने की और भी अधिक जरूरत है। ' मीडिया दरबार ' एक ऐसा मंच था जिसे मैंने ही करीब साल भर की कड़ी मेहनत से खड़ा किया था। उसे मैंने राजस्थान के एक ' बेस्ट वेब डिज़ाइनर ' नामक फर्म से बनवाया था। उस डिज़ाइनर ने बड़ी ही चतुराई से इसे अपने नाम स...

यशवंत की निर्दोषिता का साक्ष्य : विनोद कापडी का वीडियो

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यशवंत की निर्दोषिता का साक्ष्य : विनोद कापडी का वीडियो कुमार सौवीर || आइये , आज हम आपको दिखाते हैं पत्रकारिता की किताब के ऐसे गन्‍धाते-स्‍याह-काले पन्‍ने , जिनके चलते पूरी पत्रकारिता को ही शर्मसार होना पड़ा है। ताजा मामला है इंडिया टीवी चैनल के प्रबंध संपादक विनोद कापड़ी और मीडियाखबर डॉट कॉम के संचालक पुष्‍कर पुष्‍प तथा सी-न्‍यूज चैनल के दिल्‍ली पत्रकार मुकेश चौरसिया की करतूतों का। कापड़ी से लिया गया इंटरव्‍यू इन पत्रकारों के चलते भले ही यू-ट्यूब पर रिमूव कर दिया गया हो , लेकिन हमारे पास यह इंटरव्‍यू का फुटेज बाकायदा मौजूद है। लेकिन इन पत्रकारों ने जो भी किया , उससे पत्रकारिता हमेशा लज्जित तो होती ही रहेगी।  मामला था भड़ास 4 मीडिया डॉट काम के संपादक यशवंत पर रंगदारी वसूलने की कोशिश और अश्‍लील एसएमएस भेजने का आरोप का। नोएडा के दो अलग-अलग दो मामलों में दर्ज इन मुकदमों में इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक विनोद कापड़ी दम्‍‍पत्ति ने कई आरोप भी लगाये थे , लेकिन इस वीडियो ने इसी बीच ही यह खुलासा कर दिया कि रंगदारी दरअसल यशवंत सिंह ने नहीं , बल्कि कुछ बड़ेनुमा पत्रकार और चिंटू-पिंटू ने...

यशवंत को जमानत: हौसला बुलंद है , अपराध नही किया है मैने

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यशवंत को जमानत : हौसला बुलंद है , अपराध नही किया है मैने आज भड़ास 4 मीडिया के संपादक यशवंत सिंह को जमानत मिल गई है. उन्‍हें साक्षी जोशी कापड़ी द्वारा दर्ज कराए गए मामले में कोर्ट ने जमानत दी है. इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी तथा उनकी दूसरी पत्‍नी व आईबीएन 7 की एंकर साक्षी जोशी कापड़ी ने यशवंत के खिलाफ क्रमश: नोएडा के फेज टू तथा सेक्‍टर 49 थाने में अलग अलग मुकदमा दर्ज कराया था. तीस जून की दोपहर दर्ज कराए गए मामले में नोएडा पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए दो घंटे के भीतर ही यशवंत को गिरफ्तार कर लिया था. साक्षी जोशी द्वारा दिए गए शिकायत पर सेक्‍टर 49 की पुलिस ने आईपीसी की धारा 294 तथा 7 सीएलए के तहत मामला दर्ज किया था. बाद में परेशान करने की नीयत से पुलिस ने इसमें दो और धाराएं आईपीसी के तहत 509 तथा 72 आईटी एक्‍ट जोड़ दिया था. पुलिस ने अपनी तरफ से मामले को और ज्‍यादा लटकाने की कोशिश की परन्‍तु माननीय जज अनिल कुमार यादव ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत याचिका खारिज करने की मांग को अस्‍वीकार कर दिया. यशवंत की तरफ से बहस वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता शिखर ठकराल ने की. अब वि...

देखें विनोद कापडी के सच का वीडियो

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 : यशवंत मामले मे सच आया सामने : विनोद कापडी ने माना नही मांगी थी रंगदारी गलत मुकदमा दर्ज करवाने के दोषी हैं नोएडा एस एस पी प्रवीण कुमार यशवंत के उपर इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक विनोद कापरी से रंगदारी मांगने का मुकदमा चल रहा है । इस मुकदमे का सबसे अहमं पहलू है कानून की वो धारा जो यशवंत के उपर पुलिस ने लगाई है । एक धारा रंगदारी मांगने की लगाई गई है । धारा ३८६ , इस धारा के अन्तर्गत यह प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति किसी को जान मारने का भय दिखाकर रंगदारी मागता है तो उसके खिलाफ़ धारा ३८६ के तहत कार्रवाई होगी ।  इस धारा के तहत सजा तो दस वर्ष है लेकिन इसका ट्रायल मजिस्ट्रेट के यहा होने का प्रावधान है , मतलब सजा की अधिकतम अवधि तीन वर्ष है ।   जो मुकदमा  यशवंत के उपर हुआ है उसके अनुसार जान मारने की धमकी देने का कोई आरोप नही है । अभीतक मुकदमा करने वाले विनोद कापरी का कोई बयान नही आया था । लेकिन सी न्यूज के मुकेश चौरसिया ने विनोद कापरी का इन्टरव्य़ू लिया है । इ...

अखिलेश के जन्मदिन पर यशवंत को जेल की सौगात

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अखिलेश के जन्मदिन पर यशवंत को जेल की सौगात सपा का कानून : यशवंत को जेल और जेल मे बंद विधायको को मुख्यमंत्री आवास पर लंच एक जुलाई को यूपी के युवा मुख्यमंत्री जिनके चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट तैरती रहती है उनका जन्मदिन था । जब से यूपी के सीएम बने हैं अखिलेश    , उनके चेहरे पर मुस्कुराहट और चौडी हो गई है ( हालांकि इतना मुस्कुराना भी स्वास्थ्य के लिए ठिक नही ) उधर यूपी चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी के चेहरे से मुस्कुराहट गायब । लगता है दोनो में मुस्कुराने की प्रतियोगिता हो रही है । दावे तो अखिलेश ने बडे बडे किए लेकिन नाम बडे और दर्शन छोटे वाली तर्ज पर दावे सिर्फ़ दिखावटी बनकर रह गए । यशवंत  ने सपा के मंत्री शिवपाल यादव से एक विशेष पोर्टल जो यूपी चुनाव के लिए यशवंत ने बनाया था उसका उदघाटन भी कराया , उदघाटन समारोह मे यशवंत ने पत्रकारो से अपील की सपा  का साथ देने की । यह वादा उन्होने कर डाला कि अगर सपा के राज में कभी भी पत्रकारो के साथ ज्यादती होगी तो वे उस मामले को उठायेंगें और न्याय दिलवायेंगें । आज यशवंत खुद न्याय मांग रहे हैं । यह उदाहरण है राजनीति में...

मजिस्ट्रेट ने खारिज की यशवंत की जमानत याचिका

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मजिस्ट्रेट ने  खारिज की यशवंत की जमानत याचिका ·          पुलिस ने लिया समय : गलत धारा मे हुआ है मुकदमा ·         वेब मीडिया मे छिडी बहस यशवंत सिंह की जमानत  याचिका आज मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दी । वस्तुत : कल जमानत याचिका दाखिल हीं नही हुई थी । कल सिर्फ़ यशवंत को न्यायिक हिरासत मे लेते हुये जेल भेजा गया था याचिका पर सुनवाई आज हुई । दो मुकदमे यशवंत पर हुये हैं । एक मुकदमे मे जमानत याचिका खारिज हो गई तथा दुसरे मुकदमे मे पुलिस ने दो दिन का समय लिया है । जिला न्यायाधीश के यहां अभी कोई जमानत याचिका नही दाखिल की गई है । लेकिन इस बदलते घटनाक्रम मे वेब मीडिया के कुछ लोगों ने जो बहस छेड दी है वह निराशाजनक है । अधिकांश महानुभावों के कथन का जो सार है , उसके अनुसार यशवंत मे शराब पीकर गाली देने की आदत थी , रात – बिरात किसी को भी फ़ोन लगा कर तंग करना भी उसकी आदत मे शामिल था । हालांकि सभी ने एक स्वर में यह माना की यशवंत ने हमेशा आम पत्रकारो के मामलो को पुरी शिद्दत के साथ उठाया है   बडे अखबार और म...

क्या नीरा राडिया का हाथ है यशवंत की गि्रफ़्तारी मे ?

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क्या नीरा राडिया का हाथ है यशवंत की गि्रफ़्तारी मे ? भडास मीडिया के संपादक यशवंत सिंह की गिरफ़्तारी का ताना बाना बहुत पहले से बुना जा रहा था ।   यह बात है उस समय की जब निरा राडिया टेप प्रकरण चर्चा के केन्द्र मे था । निरा राडिया जिसे जानबूझकर २जी घोटाले में सरकारी गवाह सीबीआई ने बनाया ताकि टाटा की पोल न खुले अन्यथा बहुत सारे नेताओं के प्यार की कहानी सामने आ जाती । निरा राडिया टेप प्रकरण को आउटलुक , ओपेन मैगजीन तथा भडास ने भी खुब प्रचारित किया था । टेप के कारण राडिया और टाटा को कितनी फ़जीहत उठानी पडी यह किसी से छुपा नही है । निरा राडिया ने आउटलुक के विनोद मेहता को संपादक के पद से हटवा दिया , भले हीं वे उचें पद पर चले गये हों लेकिन कम से कम लिखने का अधिकार तो उनके हाथ से निकल हीं गया । दुसरा निशाना बना ओपन मैगजीन जो बंद होने के कगार पर है । दो मुख्य दुश्मनों को समाप्त करने के बाद बारी थी यशवंत सिंह की । इधर इंडिया टीवी की आर्थिक हालत अच्छी नही थी । रजत शर्मा को धन की जरुरत थी । निरा राडिया का काम ही रहा कारपोरेट घराने के पक्ष मे अधिकारियों से रिश्ते बनाने का । मौका मिला ...

पुलिस हिरासत में सूरजपुर कोर्ट परिसर से बाहर जाते यशवंत सिंह

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पुलिस हिरासत में सूरजपुर कोर्ट परिसर से बाहर जाते यशवंत सिंह संजय तिवारी आज सुबह नौ बजे के करीब हुई. रात में सोने से पहले मोबाइल बंद कर दिया था इसलिए उठने के थोड़ी देर बाद मोबाइल आन किया तो पहला फोन इस सूचना के साथ आया कि सुना है आपका '' मित्र '' यशवंत सिंह गिरफ्तार हो गया है ? क्या के बाद सूचना देनेवाले से दूसरा सवाल यही था क्यों ? तो उसने कहा अखबार पढ़ लीजिए. हिन्दुस्तान में छपा है हिन्दुस्तान के दिल्ली संस्करण के नेशनल पेज पर एक चार कॉलम की खबर है. भड़ास 4 मीडिया के साइट का संचालक गिरफ्तार. खबर की भाषा ऐसी है मानों सड़क से किसी उठाईगीर को पुलिस ने धर दबोचा है. तबसे लेकर अब तक सिर्फ फोन आ रहे हैं और लगभग हर कोई यही जानना चाहता है कि यशवंत सिंह के साथ क्या हुआ ? अगर आप मीडिया से जुड़े हैं या नहीं भी जुड़े हैं और नये नये मीडिया के कुछ पोर्टलों में भड़ास को भी जानते हैं तो आप भी शायद यही जानना चाहेंगे कि यशवंत के साथ क्या हुआ ? ढाई बजे के करीब ग्रेटर नोएडा के कचहरी परिसर में मैं भी जब यशवंत से मिला तो यही जानने की कोशिश की कि आखिर हुआ क्या ? हिन्दुस्...