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भ्रष्टो को साथ ले , भ्रष्टाचार के खिलाफ़ राजद- कांग्रेस का आंदोलन

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स्थानीय प्रतिनिधियों को अधिकार नही जेल चाहिये मुखिया - पार्षदो को राजद – कांग्रेस का समर्थन नितीश का विरोध क्या षडयंत्र है ? भ्रष्टो को साथ मे लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लडाई , हास्यापद राजद – कांग्रेस चेत जायें। अभी बिहार के गया जिले मे एक नया शगुफ़ा छोडा है स्थानीय प्रतिनिधियों ने । उनका कहना है कि अधिकारी उन्हे अधिकार प्रदान नही कर रहे हैं । स्थानीय प्रतिनिधि यानी नगर निकाय , नगरपालिका , नगर निगम एवं पंचायत के निर्वाचित   प्रतिनिधि , मुखिया , सरपंच , मेयर अध्यक्ष वगैरह । राजीव गांधी के लिये गये निर्णयों मे सबसे गलत था स्थानीय निकायों को संवैधानिक मान्यता प्रदान करना। भ्रष्टाचार के खाते मे जानेवाले एक रुपया मे से अस्सी पैसा इन्हीं प्रतिनिधियों की जेब मे जाता है । एक मुखिया या पार्षद चुनाव जितने के पहले हीं साल में सायकिल से बेलोरो या स्कार्पियो पर चलने लगता है जबकि उसे कोई वेतन नही मिलता है । नगरपालिका और जिला परिषद के अध्यक्ष , उपाध्यक्ष के चुनाव मे चुननेवाले प्रतिनिधियों की खरीद - बिक्री का खेल खेला जाता है। मैने बहुत पास से गया नगर निगम का खेल देखा है । १०...

जिलाधिकारी ने अपराधी को दी जीत की बधाई

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जिलाधिकारी ने अपराधी को दी जीत की बधाई सुशासन में निर्विरोध जीतते हैं दुर्दांत अपराधी   बिहार में नगर निकाय का चुनाव होने जा रहा है । गया नगर निगम का चुनाव १७ मई को है। नामांकन वापसी के बाद एकमात्र व्यक्ति निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है । वह सामाजिक कार्यकर्ता नही है न हीं शरीफ़ आदमी जिसके पक्ष में लोग सामुहिक रुप से चुनाव न लडने का निर्णय लें। पंचायत या वार्ड का चुनाव निर्विरोध होना बहुत हीं अच्छी बात है , बशर्ते बगैर भय के कोई निर्विरोध निर्वाचित हो लेकिन यह व्यक्ति जिसका नाम इबरार अहमद उर्फ़ भोला मियां है वह  शातिर अपराधी रहा है और आज भी अपराध तथा भय का आतंक पैदा किये हुये है। अबरार अहमद उर्फ़ भोला मियां के उपर दर्जनों मुकदमें थें। लेकिन इसी सुशासन के काल में वह अधिकांश मुकदमों में बरी हो गया। गवाहों को भयभीत करके वह रिहा हुआ है । आज की तारीख में वह आतंक है लेकिन मात्र एक मुकदमा उसके उपर है , हो सकता है उसमें भी वह बरी हो जाय । पहले भी यह एकबार निर्विरोध निर्वाचित हुआ था । लेकिन दुसरी बार दिल्ली की एक महिला पत्रकार ने उसके खिलाफ़ चुनाव लडने की हिम्...

नीतीश का एक नया ड्रामा ; ग्रामसभा में जमीन विवाद का निपटारा

नीतीश का एक नया ड्रामा ग्राम कचहरी में होगा जमीन विवाद का निपटारा गया के एल आर डी सी नंदकिशोर चौधरी   ने अरबो की जमीन भू माफ़ियाओं के नाम किया बिहार मीडिया की चुनौती हिम्मत है तो जांच कराये सरकार लालू के पन्द्रह साल से ज्यादा     की  सरकारी संपति   की लूट नीतीश के छह साल में । एक पुरानी कहावत है बिल्ली के भागे छीका टूटा ; बस नीतीश की किस्मत तेज थी , लालू का अंतिम सात वर्ष का फ़ायदा उठाया और आ गयें सता में । जब से आयें हैं , विकास के प्रचार की ऐसी घुटी पिला रहे हैं कि अब विकास नाम की उस घुटी का नाम सुनते हीं उबकाई आने लगती है । नीतीश ने आने के बाद एक से एक कानून बनाना और उसकी उपलब्धि गिनाना शुरु कर दिया । जो उपलब्धि वह गिनाते हैं , वह वस्तुत : उनके प्रशासन यानी राम राज्य वाले सुशासन के अधिकारियों द्वारा उन्हें बताया जाता है । एक कानून लाया था राईट टू सर्विस एक्ट जिसके तहत फ़ार्म भरने के २१ दिन के अंदर आपको जाति से लेकर आय तक का प्रमाण – पत्र उपलब्ध करा दिया जायेगा । इस कानून से जहां आम जनता को खुश होना चाहिये वहीं आम जनता रो रही है और ब्लाक का कर्म...

गांव – गांव तक भ्रष्टाचार की कवायद पुरी

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गांव – गांव तक भ्रष्टाचार की कवायद पुरी एक बार फ़िर चुनी गई भ्रष्टाचारियों की नई फ़ौज पंचायती राज व्यवस्था के तहत महिलाओं को आरक्षण देने का ढिंढोरा पिटनेवाले और इसे महिला सशक्तिकरण का नाम देकर अपने चमचे अखबारों के हवाले से अपनी उपलब्धि बतानेवाले नीतीश कुमार ने पुन: पंचायत चुनाव कराकर एक बार फ़िर गांवों को भ्रष्टाचारियों के हाथ में सौंप दिया है। गांवों की स्थिति अत्यंत दयनीय है । महिलाओं को पता भी नही की वे उम्मीदवार हैं। वोटो की खुलेआम खरीद –बिक्री हुई । एक – एक प्रत्याशी ने पांच से दस लाख रुपये खर्च किये । यह एक निवेश था पचास से एक करोड कमाने का । मुखिया की कमाई के ढेर सारे श्रोत हैं। नरेगा सबसे बडा है। २० आदमी की जगह पर ६० आदमी को काम करते दिखाया जाता है , उनको बैंक के द्वारा भुगतान भी होता है । लेकिन उसमे से मात्र ३० प्रतिशत हीं मजदूर को मिलता है बाकी का सत्तर प्रतिशत मुखिया, पंचायत सेवक, परियोजना पदाधिकारी खा जाते हैं। यह सब उच्च अधिकारियों की जानकारी में होता है । नाम न छापने की शर्त पर एक परियोजना पदाधिकारी ने बिहार मीडिया को बताया की पचास हजार रुपया महीना उसे गया के डीडीसी को देन...