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भारत संप्रभुता संपन्न राष्ट्र नही है

भारत संप्रभुता संपन्न राष्ट्र नही है पूंजीवाद को गले लगाने के पहले हमने यह भी नही सोचा कि अपने देश की संप्रभुता का क्या हश्र होगा। पूंजीवाद कुछ देशों के हाथ में अपनी अर्थ व्यवस्था को सौप देना था , यह एक प्रकार की आर्थिक गुलामी थी। आज इसका सर साफ़ दिखा। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध   लगाया है साथ हीं यह भी घोषणा की है कि जो राष्ट्र इरान के साथ व्यवसाय करेंगें उनके साथ भी अमेरिका के व्यवसायिक संबंध खत्म हो जायेगें। हम सस्ते तेल का आयात इरान से करते हैं । १२ प्रतिशत तेल इरान से आता है । अमेरिका की इस घोषणा के बाद भारत की सरकार अमेरिका के आगे गिडगिडा रही है , माई – बाप कुछ छूट दे दें। हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जायेगी । शर्म आ   रही है   खुद को इस देश का नागरिक कहने में । आज फ़िर सोचने का वक्त आ गया । देश के सभी राजनीतिक दल , पत्रकार एवं देशभक्तों के लिये यह परीक्षा की घडी है । हमारे भी पाकिस्तान के साथ गहरे मतभेद है लेकिन क्या हम अगर प्रतिबंध लगायेंगें तो अमेरिका पाकिस्तान से अपने संबंध समाप्त कर लेगा ? कभी हम गुटनिरपेक्ष आंदोलन के नेता थें , एक ऐसा भी वक्त आया था जब इसी ...

अन्ना के कैंप में फ़ैली निराशा ; अथक प्रयास के बाद भी नही जुटी भीड

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अन्ना के कैंप में फ़ैली निराशा ; अथक प्रयास के बाद भी नही जुटी भीड अन्ना चौकडी का मीडिया मैनेजमेंट पिछली बार दमदार था । मीडिया को कैसे मैनेज किया जाता जाता है , इसकी जानकारी रखनेवालों को पता है , भारत का मीडिया नियंत्रित होता है विदेश से । अमूमन इस तरह के आंदोलन का प्रबंध पर्दे के पिछे रहकर कार्य करनेवाली ताकते करती हैं। पिछली बार अगस्त में कुछ ज्यादा उत्साहित होकर विदेशी ताकते जिनमें मुख्य सीआईए है ने मीडिया को मैनेज किया था और अच्छी भीड अन्ना के आंदोलन में लगी थी । भीड का स्वभाव चुंबक की तरह होता है । भीड को देखकर भीड जुटती है । सीआईए और उसके कार्यों को कवर देनेवाली संस्था फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन के बारे में सबको पता चल जाने के बाद इसबार उन्होनें खुद को अन्ना के आंदोलन से दुर रहकर आंकलन   करने का निश्चय किया । आर एस एस ने भी पिछली बार आंदोलन को समर्थन दिया था और पूरे देश में उसके कार्यकर्ता आंदोलन के पक्ष में सडकों पर उतरे ...