टाइम्स आफ़ इण्डिया, पटना के कर्मचारी पन्द्रह दिन से धरने पर
टाइम्स आफ़ इण्डिया, पटना के कर्मचारी पन्द्रह दिन से धरने पर टाइम्स ऑफ़ इण्डिया, पटना संस्करण १५ जुलाई २०११ को कुम्हरार स्थित टाइम्स समूह के प्रिंटिग प्रेस में ही छपा था लेकिन १६ जुलाई २०११ का टाइम्स ऑफ़ इण्डिया टाइम्स हाउस के अपने प्रिंटिंग प्रेस की बजाय प्रभात खबर के प्रिंटिंग प्रेस से क्यों छपने लगा...? अख़बार समूह ने प्रिंटिंग प्रेस बंद करने की इजाजत बिहार सरकार से क्यों नहीं ली...? एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र में कॉरपोरेट सेक्टर के सभी कार्य राष्ट्रीय कानून के तहत निर्धारित होते हैं लेकिन टाइम्स ऑफ़ इण्डिया प्रबंधन ने अपने कार्यरत कर्मचारियों को कोई सूचना दिए बिना अचानक सेवामुक्त करने का अधिकार कहाँ से प्राप्त कर लिया..? क्या मनिसाना आयोग का बकाया वेतन देने और भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित वेजबोर्ड को लागू करने से पहले वेज बोर्ड के प्रेस कर्मियों को सेवा से निकाल बाहर करना मानवाधिकार का हनन नहीं है..? बिहार में सुशासन की सरकार मीडिया प्रायोजित ख़बरों पर टिकी है और वजीरे-सदर नितीश कुमार टाइम्स ऑफ़ इ ण्डिया जैसे बड़े मीडिया हाउस से अपना रिश्ता मधुर रखना चाहते हैं. टाइम्स ऑफ़ इण्डि...