दारुल उलेमा देवबंद रा्ष्ट्रद्रोही संगंठन है
दारुल उलेमा देवबंद रा्ष्ट्रद्रोही संगंठन है सलमान रश्दी पहले भी भारत आते रहे हैं , लेकिन इसबार जयपुर विवादोत्सव में उनके आने को लेकर के देवबंड नामक संगठन ने जोरदार हंगामा किया , चुनाव सामने था , केन्द्र से लेकर राज्य की सरकार इन सढियल उल्लेमाओं के आगे नंगी खडी नजर आइ । इस पूरे प्रकरण ने देश के बुद्धिजिवियों के चेहरे पर पडे नकाब को उतार कर रख दिया। हुसैन के लिये रो रो कर टब भरनेवाले साम्यवादियों कान में रुई डालकर सोये नजर आयें। एक नया लेखक चेतन भगत जो हर विषय पर अपनी राय रखने का शौकिन है , उसने भी राजनीतिक बातें करना और उल्लेमाओं के पक्ष में बोलना शुरु कर दिया । देवबंद जैसी संस्थाओं को प्रतिबंधित करने की जरुरत है । आर एस एस से ज्यादा खतरा देवबंद जैसी संस्थाओं से है। ऐसा नही है कि सैटेनिक वर्सेज में सिर्फ़ इस्लाम की चर्चा है , हिंदु धर्म के उपर भी अच्छा कटाक्ष किया है सलमान रश्दी ने। एक जगह यह लिखा है कि कुछ औरतों को गनेश का मुखौटा लगे गीब्रील फ़रिश्ता के साथ सेक्स करना ज्यादा आनंद दायक लगता है । गब्रील फ़रिश्ता फ़िल्मों में हिंदु देवताओं का चरित्र...