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एन डी टी वी दर्शको कों उल्लू समझता है

एन डी टी वी दर्शको कों उल्लू समझता है अन्ना का आर एस एस के साथ संबंध है तथा अन्ना ने नानाजी देशमुख के साथ एक संस्था   बनाई थी , इससे संबंधित समाचार तथा फ़ोटो नई दुनिया ने प्रकाशित किया था । उसके बाद किरन बेदी ने दिग्विजय सिंह की नानाजी देशमुख के साथ एक फ़ोटो ट्विट किया । बस एक नई बहस छिड गई तस्वीरों को लेकर । अन्ना ग्रुप यह तर्क देने लगा कि अन्ना की तस्वीर नाना जी देशमुख के साथ होने के आधार पर उनका आर एस एस से संबंध नही जोडा जा सकता । मीडिया की भूमिका सबको पता है , एक डी टी वी एक कदम आगे निकल कर नानाजी के साथ अन्य नेताओं की तस्वीर दिखाने लगा और प्रश्न खडा कर दिया कि क्या जिन नेताओं की तस्वीर नाना जी के साथ उन्हें तस्वीरों के आधार पर आर एस एस से संबंधित बताया जा सकता है । सबसे पहले तो यह सारा मामला हीं एन डी टी वी ने गलत तरीके   से प्रस्तुत किया । नई दुनिया ने तस्वीर के साथ यह खबर भी छापी थी कि अन्ना हजारे ने नाना जी देशमुख के साथ मिलकर एक संस्था बनाई थी “ ग्राम विश्व “ इस संस्था के अध्यक्ष नानाजी देशमुख थें और महासचिव अन्ना । यह संस्था दीन दयाल शोढ संस्थान से जुडी हुई थी ...

कामवाली बन न जाये घरवाली

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कामवाली बन सकती है सौत एक वेब पोर्टल है मधेपुरा टाइम्स , राकेश सिंह , रुद्र नारायन यादव   और पंकज भारतीय इसका संचालन करते हैं । यह पोर्टल मधेपुरा के अलावा बिहार के अन्य भागों की भी जानकारी देता है । सुबह नेट पर मार्निंग वाक करते हुये मधेपुरा टाइम्स चला गया , वहां एक लेख था मधेपुरा में कामवाली यानी घर का चौका बरतन करनेवाली औरतों पर । आजकल इजी मनी का आसान रास्ता महिलाओं के लिये है अपने जमीर से समझौता करके आनंद भी लेना और पैसा भी कमाना । औरतों को घर की चारदिवारी के अंदर रखकर स्वंय जहां मौका मिला लाईन लगा देनेवाले पुरुषों के लिये यह लेख एक सबक है । सावधान हो जायें मर्द । यहां मधेपुरा टाइम्स के लेख को दे रहा हूं , आप पढें और बदलते जमाने में बदलता बिहार का आनंद उठायें। खास चिंता की जरुरत नही है , यह सामंती प्रवर् ‍ ति सदियों से चली आ रही है । कामवाली है तो उसका शरीर पर हमारा अधिकार है । मधेपुरा में सेक्स परोस रही कामवाली बाई अपसंस्कृति मधेपुरा जैसे छोटे शहर में भी अपना पाँव पसार रही है.जिला बनने के बाद स्वाभाविक तौर पर इसका विकास तेजी से होने लगा.सैंकडों कार्यालय खुले और शहर की...

गलत नियुक्ति के मामले में नीतीश कुमार शक के दायरे में

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गलत नियुक्ति के मामले में नीतीश कुमार शक के दायरे में आवेदक का पता है मुख्यमंत्री आवास , फ़र्जी कागजात पर हुई नियुक्ति । स्वच्छ छवि, सुशासन, पारदर्शिता का दावा करनेवाले नीतीश कुमार को समझना कठीन है । मुख्यमंत्री की मुस्कान मोनालिसा के मुस्कान की तरह रहस्मय है । इनकी कथनी और करनी का अंतर अब खुलकर लोगों के सामने आ रहा है । अभी एक ताजा मामला है कारा विभाग में ड्राईवर की नियुक्ति का । कारा विभाग ने ड्राईवर की नियुक्ति के लिये आवेदन आमंत्रित किया । आवेदक में एक नाम था परमानंद प्रसाद , पुत्र – सच्चिदानंद प्रसाद । इस आवेदक का पता में दर्ज है मुख्यमंत्री आवास , १ अण्णे मार्ग , बिहार पटना । चलिये यहां तक तो हम मान लेते हैं कि मुख्यमंत्री आवास में रहनेवाले किसी ्परमानंद नामक व्यक्ति ने आवेदन दिया होगा लेकिन इस पुरे खेल का सबसे मजेदार पहलु है , आवेदक के द्वारा दाखिल किया गया शैक्षिक प्रमाण पत्र तथा ड्राईविंग लायसेंस । ड्रायविंग लाईसेंस मे परमानंद की जन्मतिथी ०१।०३।१९७४ दर्ज है वहीं शैक्षिक प्रमाण पत्र में ३ जनवरी १९७६ है। यानी दोनो कागजात में से एक फ़र्जी है या शायद दोनो फ़र्जी है । परमानंद की न...