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राहुल बनाम सोनिया

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  १९९० के बाद देश की हर सरकार ने संविधान के साथ बलात्कार किया है । इस बलात्कार का मौन साक्षी बनकर विपक्ष ने भी खुद को बलात्कारी के कठघरे मे खडा कर लिया है । कांग्रेस ने बलात्कार करते करते संविधान को अपनी रखैल बनने के लिये बाध्य कर दिया । मैं किसी दुर्भावना से यह नही कह रहा हूं बल्कि इसका प्रमाण है । मुझे नही पता कितने लोगों ने संविधान की प्रसतावना को पढा है । संविधान की प्रस्तावना:                              " हम भारत के लोग , भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न , समाजवादी , पंथनिरपेक्ष , लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :              सामाजिक , आर्थिक और राजनीतिक न्याय , विचार , अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म और उपासना की स्वतंत्रता , प्रतिष्ठा और अवसर...

व्हाइट हाउस में बम फ़टा

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व्हाइट हाउस में बम फ़टा अमेरिका के राष्ट्रपति का निवास दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है । आज वहां धुआं बम फ़ेका गया । यह काम अक्यूपाई वाल स्ट्रीट के आंदोलनकारियों ने किया। वाकई  बम फ़ेका गया या उस आंदोलन को दबाने की यह एक साजिश है यह तो जांच के बाद हीं पता चल पायेगा और कोई जांच होगी नही। अक्यूपाई आंदोलन पूंजीवाद के खिलाफ़ अमेरिकी जनता का आक्रोश है । न सिर्फ़ भारत में , दुनिया के सभी देशों में जहां पूंजीवाद है , वहां अमीर और गरीब के बीच गहरी खाई है। कल तक आउट सोर्सिंग की बात उठती थी । हमारे देश का जमूरा मंटोक आउट सोर्सिंग को भारत के लिये वरदान मानता था । आज अमेरिका जो सबसे बडा आउट सोर्सिंग करनेवाला मुल्क था , उसने अपने नीतिगत घोषणा में इन सोर्सिंग यानी देश का रोजगार देश के अंदर की बात शुरु कर दी है। अक्यूपाई वाल स्ट्रीट आंदोलन वस्तुत : समाजवाद का आंदोलन है । जब व्हाइट हाउस में बम फ़टा तो ओबामा परिवार वहां नहीं था। सुरक्षा कारणों से व्हाइट हाउस को सिल कर दिया गया है। टिप्पणी के साथ अपना ई मेल दे जिस पर हम आपको जवाब दे सकें

अमेरिकी छात्रों को जरुरत है जयप्रकाश नारायन की

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अमेरिकी छात्रों को जरुरत है जयप्रकाश नारायन की भारत का चोर मीडिया खामोश क्यों अमेरिकी साम्राज्यवाद की   मौत के लिये बस एक अदद लीडर की जरुरत है अक्युपाई वाल स्ट्रीट आंदोलन को दबाने की हर प्रयास असफ़ल होता दिख रहा है । यह स्व : स्फ़ुर्त आंदोलन है जो अमेरिका में बढती अमीरों और गरीबों के बीच खाई तथा बेरोजगारी के कारण पैदा हुये जन आक्रोश का परिणाम है । सरकार ने पुलिस के बल पर आंदोलनकारियों को हटा दिया , लेकिन न्यायालय ने आदेश जारी किया कि इस शांतिपूर्ण आंदोलन को जबर्दस्ती न कुचला जाये । अब यह आंदोलन अमेरिका के कालेजों तक फ़ैल चुका है । अमेरिका और सीआईए मीडिया को मैनेज कर के इस आंदोलन से संबंधित खबरों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। भार्त का बिका हुआ मीडिया तो सोया है। दुनिया की क्रांति के इतिहास की अभूतपूर्व घटना है यह । दुनिया की दिशा बदलनेवाले इस आंदोलन को सबसे बडा खतरा मीडिया से है । इस आंदोलन की सफ़लता का अर्थ है , पूंजीवाद...