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लगे रहो असीम भाई

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लगे रहो असीम भाई वाह वाह असीम भाई , क्या छक्का मारा है , तुमने तो मुन्ना भाई को भी मात दे दिया। क्या मजेदार कार्टून बनाया है । आप महान हो , कार्टून को एक नया आयाम दिया , यह साबित कर दिया औरत मात्र औरत होती है चाहे उसे भारत माता कहो या चंपा पान दुकान के उपरवाली , किताब तो किताब है संविधान की हो या मस्तराम की । आपका लुक भी भाई दार्शनिक जैसा है , कभी आप सुर्यकांत निराला लगते हो , कभी रविन्द्र नाथ टैगोर और कभी एम एफ़ हुसैन तो कभी मा्र्क्स । भाई आपका वह जो भारत माता वाला कार्टून है न वाकई धांसू है न जाने क्यों लोग उसपर आपति उठा रहे हैं । भाई चाहे प्रतिक हो या जिंदा मां , आखिर है तो औरत हीं न , अब अगर उसके साथ बलात्कार करनेवाला कार्टून बना दिया तो क्या गलती कर दी। लोगो का क्या ये तो पत्थर की मुर्ति को मंदिर में बैठाकर पुजा करने लगते हैं , मां – मां चिल्लाने लगते हैं। एक इमारत   बना लेते हैं और उसे मस्जिद का नाम दे देते हैं , बगैर   कारण वहां जाकर नमाज पढने लगते हैं । भाई असीम आप हीं क्रांति ला सकतो हो देश में । महामुर्ख हैं इस देश के लोग इन्हे कार्टून की समझ एकदम नह...

केजरीवाल तो साला तेज निकला

केजरीवाल तो साला तेज निकला अभी एक नया विवाद खडा हो गया है , वह है अन्ना चौकडी के    सी आइ ए की कवर एजेंसी फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन के इशारे पर काम करनेवाले शातिर अरविंद केजरीवाल का बयान ।मुंबई के फ़्लाप शो के बाद  केजरीवाल को कुत्ता भी अपने योग्य नही मान रहा था । यूपी के चुनाव में कांग्रेस को सबक सिखाने का मंसूबा पाले इस एजेंट को राहुल गांधी के ड्रामे ने चारो खाने चित कर दिया था । कोई घास भी नही डाल रहा था । इसने अपने चमचो के द्वारा कुछ भीड इकठ्ठी करवाई और एक साजिश के तहत भाषण दे मारा कि संसद में चोर लुटेरे बैठे हैं । सारे राजनीतिक दल हो हल्ला मचाने लगें । इसके बयान को हमने भी टीवी पर देखा था और देखकर मुस्कुरा रहा था । इसके भाषण से टपक रही हताशा का मजा ले रहा था मैं,  और समझ गया था कि इस तरह के भाषण का मतलब खबरो मे आना है । मैने अपनी पत्नी से मजाक करते हुये यह भी कहा था , साला अब यह अपनी बीबी से भी पिटायेगा , इसने अपनी के सामने डिंग मारी होगी कि मैं प्रधानमंत्री बनुंगा , अब यह एक मुखिया बनने लायक भी नही रह गया , बेचारा । मुझे क्या मालूम कि हमारे दे...

Anna ka Dharna

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Anna ka Dharna  यह ब्लाग ओशो ने लिखा है । वह मेरा बेटा है । लिखकर के उसने मेरे ईमेल पर भेजा । मैं उसे यहां दे रहा हूं । लिखना पढना और खासकर समाज के ज्वलंत मुद्दो पर राय व्यक्त करना यह दर्शाता है कि आप समाज के लिये सोचते हैं और शायद यह सोच आपको समाज के लिये कुछ करने को भी बाध्य करती है । Anna Hazare, a well known public figure since the time his Lokpal stint gave him the INDIAN MEDIA’S   MOST ACCLAIMED “BHOOK HARTALI” AWARD is well known by all of us. So this just a reality check at how real is Anna Hzare’s claim to fame using lokpal bill as an alibi. People who’ve different opinion may keep it to themselves because im just using my right to speech. However you may as well appreciate my words and bring me a tad bit closer to Mr. Hazare. So , where were we? Yes, Anna Hazare. So the thing is when this country was leading a perfectly normal life and people had their own problems to cope up with, then came our Super-m-anna. He caused havoc in the political world and had the...

अन्ना इंपैक्ट

अन्ना इंपैक्ट मैं लोकपाल का विरोधी हूं क्योंकि उसका स्वरुप तानाशाही है। अन्ना को भी मैं एक ऐसा आदमी मानता हूं  जिसे कोई भी आदमी चापलूसी करके अपने फ़ायदे के लिये उपयोग कर सकता है । अन्ना टीम के दो आदमी महाधूर्त हैं । मनीस एवं अरविंद , बाकी दो किरन बेदी तथा प्रशांत पेज थर्ड पर छपने वाले सोसलाइट हैं। लेकिन अन्ना के खिलाफ़ रहते हुये भी एक बात के लिये आज अन्ना के आंदोलन की प्रशंसा करने का मन है । आंदोलन का उद्देश्य गलत था , विषय गलत था , परन्तु उसका असर यूपी चुनाव में दिख रहा है । यह अच्छी बात है । अगर आप गलत उद्देश्य से भी कोई काम करें और उस काम के कारण समाज के अंदर कोई सार्थक बदलाव आये यह एक उपलब्धि है। यूपी के चुनाव में कोई भी दल दागी उम्मीदवार को नही अपनाना चाहता है । चाहें वह डीपी यादव हों जिन्हें समाजवादी पार्टी ने लेने से इंकार कर दिया या फ़िर कुशवाहा जिसको लेकर भाजपा के अंदर मतभेद पैदा हो गया । यह अन्ना इंपैक्ट है , इसकी प्रशंसा होनी चाहिये । बिहार में लालू , कांग्रेस और लोजपा को यही करने की जरुरत थी । ये दल चूक गयें । मैने बिहार के विधानसभा चुनाव के पूर्व एक लेख लिखा था ...

दलाल राजदीप सरदेसाई ने किया भ्रष्ट मीडिया का बचाव

  यहां नीचे एक  लेख आइबीएन १८ के प्रधान संपादक राजदीप सरदेसाई का है। बडे हीं तार्किक ढंग से मीडिया पर लगे इस आरोप को कि अन्ना का आंदोलन मीडिया की देन है , राजदीप ने नकारने की कोशिश की है । बात वहीं तक रहती तो कोई अंतर नही पडता , लेकिन उससे भी आगे बढकर राजदीप ने अन्ना का गुणगान फ़िर शुरु कर दिया है । पत्रकार का असली चेहरा उसकी लेखनी में झलकता है ।  मीडिया के क्षेत्र में आई गिरावट के लिये अगर दस पत्रकारों को दोषी माना जाय तो उनमें से राजदीप भी एक है । प्रभु चावला , बरखा दत , आशुतोष और रवीश जैसे लोगों का एक ग्रुप है। मीडिया को मैनेज करने के लिये इन सबको मैनेज करना पडता है । ये दलाल हैं। प्रभु चावला तो सीधी बात के नाम पर टेढी बात  करते करते अपने कमाल पुत्र अंकुर चावला के कारण टेढी  बात की जगह सिधी बात करने लगें । अब चावला टेढी बात कर भी नहीं सकते बडी मुश्किल से सीबीआई के चंगुल से बचे हैं और आजकल वनवास झेल रहे हैं। बरखा पत्रकारों के बीच आने की हिम्मत नहीं जूटा पाती है ।अन्ना की सभा में हीं अपमानित हो चुकी हैं , युवा...

बुढापे में पैदा हुआ अन्ना को बेटा

बुढापे में पैदा हुआ अन्ना को बेटा आश्चर्य न करें राजनीति कुछ भी करा सकती है । जब से अन्ना पर आर एस एस से संबंध  रखने और उसके इशारे पर काम करने का आरोप लगा है , अन्ना  टीम परेशान थी , परेशानी यह थी कि अल्पसंख्यको का वोट ुनके द्वारा गठित या समर्थित भाजपा की सेक्यूलर मुखौटा वाले दल को कैसे मिलेगा । बिहार में नीतीश , एक महान सेक्यूलर हैं , लेकिन सैद्धांतिक रुप से संप्रदायिक सिद्धांतवाले दल भाजपा से खुब छनती है । राष्ट्रीय स्तर पर भी यही ड्रामा करना पडेगा , यह भाजपा को पता है । अन्ना को भी पता है , कांग्रेस और धर्मनिरपेक्ष दलों को तभी पराजित किया जा सकता है , जब उनके अंदर विरोध पैदा किया जाय । जैसा बिहार में किया गया । खैर अब अना टीम की परेशानी खत्म हो गई , अन्ना को बेटा पैदा हुआ है , वह भी  जवान सारी  सारी बुढा । बेटा भी धर्मनिरपेक्ष है , मुस्लिम जो है ।  उस बेटे का नाम है आलाउद्दीन शेख । अब आप यह न प्रश्न करें कि कौन है यह अलाउद्दीन शेख , जायज औलाद है या नाजायज । भाई ७४ वर्ष में बच्चा पैदा हुआ यह क्या कम है जो आपलोग फ़ाल...

बिहार मे भी है एन जी ओ का जाल , करोडो लेते हैं विदेश से

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बिहार मे भी है एन जी ओ का जाल , करोडो लेते हैं विदेश से ऐसा नही है कि बिहार ठगी में पीछे है । विदेशों से एक करोड रुपया से अधिक दान प्राप्त करने वाले एन जी ओ की संख्या ३० है   बिहार में । सबसे ज्यादा १२ एन जी ओ पटना में हैं। उसके बाद ४ मुंगेर में । मुंगेर के चारो एन जी ओ ने योग और धर्म के नाम पर दान लिया है और चारों का कार्यालय मुंगेर के एक हीं क्षेत्र , फ़ोर्ट एरिया , गंगा दर्शन , मुंगेर है । यानी कहीं न कहीं इन चारों का अपस में संबंध है । उसी प्रकार भागलपुर के तीन एन जी ओ हैं जिनमें से दो एन जी ओ के कार्यालय का पता एक हीं   हैं। चांसरी आफ़िस , नवाब कालोनी , भागलपुर । भागलपुर के संगठन ईसाइ हैं ।   मधुबनी का १ , रक्सौल का २ , बेतिया का २ , जमुई का १ , पुर्णिया का १ , सारण का १ , बक्सर का १ , मुजफ़्फ़रपुर का १ और रांची का भी एक संगठन है जिसने खुद को बिहार का बताया है । संगठनों की सूची में दलित के नाम पर एन जी ओ चलानेवाले ४ - ५ संगठन हैं , सबसे मजेदार बात है कि फ़ुटपाथी दुकानदार और ठेला खोमचा वालों के नाम पर स्थापित नासवी यानी न्यू एसोशियेशन आफ़ स्ट्रीट वेंडर आफ़ इंडिया ...

क्या एन जी ओ को लोकपाल से बचाने के लिये अरुण जेटली ने पैसे खायें ?

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एन जी ओ ट्रस्ट , तोपपाल से बाहर हों : भाजपा यह है भाजपा का विचार जो उसके नेता अरूण जेटली ने राज्यसभा में प्रस्तुत किया । भाजपा ने राज्यसभा में बहस के दौरान एन जी ओ और ट्रस्ट को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की ्बात की और उसके नेता अरूण जेटली ने अपने तर्क के पीछे कारण बताया कि इनको लोकपाल के दायरे में रखने का अर्थ होगा निजता में हस्तक्षेप । अरुण जेटली एक अधिवक्ता हैं , अगर किसी और सांसद ने यह बात कही होती तो क्षम्य था लेकिन कोई अधिवक्ता यह बोले , आश्चर्य है । एन जी ओ का निबंधन सोसायाटी रजिस्ट्रेशन एक्ट १८६० की धारा २१ के तहत होता है । सरकार के खाते में एक निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद , निबंधन से संबधित कागजात निबंधन विभाग के पास जमा किया जाता है । किसी भी निबंधित संस्था के कागजातों की सच्ची प्रतिलिपी   कोई भी व्यक्ति एक तयशुदा रकम देकर हासिल कर सकता है । जब कोई भी व्यक्ति इसे हासिल कर सकता है तो यह निजी कैसे हुआ। यह पब्लिक डाक्यूमेंटस की श्रेणी में आ गया । अब एक और उदाहरण देता हूं । आर टी आई एक्ट में भी निजता की रक्षा का प्रावधान है । किसी तिसरे आदमी के बारे में सूचना नही द...

तोपपाल ने बनाया सबको उल्लू

तोपपाल ने बनाया सबको उल्लू किसी भी चीज को बिना परखे उसके लिये चाह नही पैदा करनी चाहिये । दो खुराफ़ाती थें , उन्हें नाम कमाने की बडी इच्छा थी । चाहते ्थें कुछ ऐसा करें कि नाम और दाम दोनो आये और महान भी कहलायें। एक था पत्रकार और एक आइएएस बनने में फ़ेल हो गया आइआरएस । लगे रहें खोजबीन में । अचानक उन्होनें देखा पूरी दुनिया में उथल पुथल मची हुई है । अनेको देश में क्रांति क्रांति का नारा लग रहा है , बस उछल पडे दोनो । उन्हें राह मिल गई थी । उन्होने अपने मित्र , सलाहकार , व्यवसायिक मित्रों से सलाह मशवरा शुरु किया । खोजकर के एक नाम निकाला लोकपाल । बडा धांसू नाम था । लोगो को लूभा   सकता था । क्रांति के लिये विषय चुनने में कोई मेहनत नही करनी पडी । देश के लोगों का गुस्सा भ्रष्टाचार के खिलाफ़ था । उसको हीं मुद्दा बनाने का फ़ैसला लिया । माल के लिये एक व्यवसायिक मित्र ने विदेश से दान दिला दिया । सज गया मंच । अब कुछ महा गदहों को खोजने की जरुरत थी , जो अक्ल के अंधे हो लेकिन नाम नयन सुख हो । वह भी मिल गयें , हमारे देश में नयनसुखों की कमी तो है नही। नाम दारोगा काम चोरी , नाम रामजी काम चिरहर...