Posts

Showing posts with the label municipality

भ्रष्टो को साथ ले , भ्रष्टाचार के खिलाफ़ राजद- कांग्रेस का आंदोलन

Image
स्थानीय प्रतिनिधियों को अधिकार नही जेल चाहिये मुखिया - पार्षदो को राजद – कांग्रेस का समर्थन नितीश का विरोध क्या षडयंत्र है ? भ्रष्टो को साथ मे लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लडाई , हास्यापद राजद – कांग्रेस चेत जायें। अभी बिहार के गया जिले मे एक नया शगुफ़ा छोडा है स्थानीय प्रतिनिधियों ने । उनका कहना है कि अधिकारी उन्हे अधिकार प्रदान नही कर रहे हैं । स्थानीय प्रतिनिधि यानी नगर निकाय , नगरपालिका , नगर निगम एवं पंचायत के निर्वाचित   प्रतिनिधि , मुखिया , सरपंच , मेयर अध्यक्ष वगैरह । राजीव गांधी के लिये गये निर्णयों मे सबसे गलत था स्थानीय निकायों को संवैधानिक मान्यता प्रदान करना। भ्रष्टाचार के खाते मे जानेवाले एक रुपया मे से अस्सी पैसा इन्हीं प्रतिनिधियों की जेब मे जाता है । एक मुखिया या पार्षद चुनाव जितने के पहले हीं साल में सायकिल से बेलोरो या स्कार्पियो पर चलने लगता है जबकि उसे कोई वेतन नही मिलता है । नगरपालिका और जिला परिषद के अध्यक्ष , उपाध्यक्ष के चुनाव मे चुननेवाले प्रतिनिधियों की खरीद - बिक्री का खेल खेला जाता है। मैने बहुत पास से गया नगर निगम का खेल देखा है । १०...

गया मेयर –डिपुटी मेयर चुनाव : बेंगो की खरीद-बिक्री शुरु

Image
गया मेयर – डिपुटी मेयर चुनाव : बेंगो की खरीद - बिक्री शुरु मेढक को आम जन की भाषा में बेंग कहते हैं । बेंग का एक लक्षण है , उसे कभी भी एक बर्तन में आप नही रख सकते हैं। एक बेंग को पकडकर टोकरी में रखा तबतक दुसरा बेंग उछल कर बाहर । नगर निगम के पार्षदों में यह गुण पुरी तरह से मौजूद है। शायद – नाली साफ़ करवाते करवाते उन्होने यह गुण बेंगो से ग्रहण कर लिया है । यह मैं नही कहता बल्कि पार्षद स्वंय भी एक दुजे को प्यार से बेंग कहते हैं। गया नगरनिगम का चुनाव संपन्न हो गया । तिरपन बेंग जितकर आये हैं। बेंगो की सरकार बननी है । कौन मेयर बनेगा और कौन उप मेयर इसके लिये बेंग-  दौड शुरु हो गई है। इस दौड के नियम पहले आपको बता देता हूं । कौन कितने बेंग को खरीदता है इसपर निर्भर है मेयर या उप मेयर बनना । जिसके टोकरी में ज्यादा बेंग  होगा वही मेयर बनेगा । पिछली बार पचास हजार से तीन लाख तक में बेंग बिके थें। इसबार पुराने बेंग ज्यादा जितकर आये हैं , अब वे मक्कार बन गये हैं , उनका मकसद है ज्यादा से ज्यादा किमत वसूलना । । पुराने पार्षदों नें पांच साल में पैसा भी अच्छा खासा कमा लिया है । इसबार त...

बिहार चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा दाव पर

Image
बिहार चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा दाव पर गया नगर निगम चुनाव : पदाधिकारियों की अविवेवकपूर्ण हरकत मतदाता वार्ड के , उनके बीच स्थित मतदान केन्द्र दुसरे वार्ड का । बिहार में सबसे बडी समस्या भ्रष्ट अधिकारी और पक्षपातपूर्ण कार्य करने वाले अधिकारी हैं। नियमत : नगर निकाय चुनाव में जिला निर्वाचन पदाधिकारी संबंधित जिले की जिलाधिकारी होती हैं। लेकिन चुनाव के कार्य के लिये सहायक निर्वाचन पदाधिकारी सहित अनेको अधिकारियों को जिम्मेवारी सौपी जाती है। यह ताजा मामला मतदान केन्द्रों के परिवर्तन का है। गया के वार्ड संख्या 48   में तीन मतदान केन्द्र वहां मतदाताओं के बीच स्थित स्कुल उर्दु प्राथमिक विद्यालय पठानटोली में स्थित था । ये तीनों मतदान केन्द्र मतदाताओं के बीच स्थित थें तथा वार्ड संख्या 48   मे थें। यह वार्ड मानपुर प्रखंड के क्षेत्राधिकार में है। इस क्षेत्र में कोयरी जाति का जातीय संगठन चलाने वाले एक नेता इन्द्रदेह विद्रोही   ने मतदान केन्द्र को वार्ड संख्या   47   में होने की शिकायत की ।   मानपुर के बीडीओ तथा सीओ  ...

गया नगर निगम चुनाव : प्रशासन की अच्छी पहल

गया नगर निगम चुनाव : प्रशासन की अच्छी पहल लेकिन बहुत कुछ करना है अभी बिहार में नगर निकाय के चुनाव होने वाले हैं । मतदान 17 मई को है। यहां की जिलाधिकारी बंदना प्रेयसी हैं। एक अच्छी और संवेदनशील अधिकारी हैं। निष्पक्ष चुनाव के लिये बिहार चुनाव आयोग ने बहुत सारे सराहनीय कदम उठाये हैं। गया में इसका प्रभाव दिख रहा है । चुनाव कार्यालय खोलकर शराब और मुर्गा का दौर चलानो वाले प्रत्याशियों के यहां सदर अनुमंडलाधिकारी परितोष कुमार तथा पुलिस प्रशासन ने छापेमारी की । मुकदमे दर्ज किये गये। अवैध रुप से चुनाव कार्यालय खोलकर बैनर लगाने वालों पर भी कार्रवाई की गई । अभी एक नया आदेश हुआ है , दबंग प्रत्याशियों को जिला बदर करने का । यह सराहनीय है । वैसे भी प्रत्याशी का सारा कार्य करने का अधिकार उसके चुनाव अभिकर्ता यानी एलेक्शन एजेंट को है , इसलिये प्रत्याशी क्षेत्र में रहे न रहे इससे कोई अंतर नही पडने वाला । हां एक कानूनी पहलू जरुर जुडा हुआ है . जिला बदर करने का प्रावधान अपराध नियंत्रण कानून की धारा ३ तथा Bihar Maintenance of Public order act 1949 ( amended 1961) की धा...

जिलाधिकारी ने अपराधी को दी जीत की बधाई

Image
जिलाधिकारी ने अपराधी को दी जीत की बधाई सुशासन में निर्विरोध जीतते हैं दुर्दांत अपराधी   बिहार में नगर निकाय का चुनाव होने जा रहा है । गया नगर निगम का चुनाव १७ मई को है। नामांकन वापसी के बाद एकमात्र व्यक्ति निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है । वह सामाजिक कार्यकर्ता नही है न हीं शरीफ़ आदमी जिसके पक्ष में लोग सामुहिक रुप से चुनाव न लडने का निर्णय लें। पंचायत या वार्ड का चुनाव निर्विरोध होना बहुत हीं अच्छी बात है , बशर्ते बगैर भय के कोई निर्विरोध निर्वाचित हो लेकिन यह व्यक्ति जिसका नाम इबरार अहमद उर्फ़ भोला मियां है वह  शातिर अपराधी रहा है और आज भी अपराध तथा भय का आतंक पैदा किये हुये है। अबरार अहमद उर्फ़ भोला मियां के उपर दर्जनों मुकदमें थें। लेकिन इसी सुशासन के काल में वह अधिकांश मुकदमों में बरी हो गया। गवाहों को भयभीत करके वह रिहा हुआ है । आज की तारीख में वह आतंक है लेकिन मात्र एक मुकदमा उसके उपर है , हो सकता है उसमें भी वह बरी हो जाय । पहले भी यह एकबार निर्विरोध निर्वाचित हुआ था । लेकिन दुसरी बार दिल्ली की एक महिला पत्रकार ने उसके खिलाफ़ चुनाव लडने की हिम्...