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अंबेदकर का कार्टून : दलित नेताओं का बौद्धिक दिवालियापन

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अंबेदकर का कार्टून : दलित नेताओं का बौद्धिक  दिवालियापन आज लोकसभा में अंबेदकर के एक कार्टून पर भारी विवाद पैदा हो गया । कांग्रेस के सामंती दलित  नेता पुनिया ने कपिल सिब्बल का कडा विरोध किया । उनका कहना था कि किताब के प्रकाशक एन सी ई आर टी को पत्र लिखने के बावजूद भी अंबेदकर के उस कार्टून को पुस्तक से नही निकाला गया । एकबार भी किसी ने यह बताना आवश्यक नही समझा कि वाकई मामला क्या है और वह कौन सा कार्टून है जिसको लेकर तथाकथित दलित भगवान लोग इतने खफ़ा हैं । यह कार्टून 1960   में प्रकाशित हुआ था । का्र्टूनिस्ट शंकर के बनाये हुये इस कार्टून में बाबा साहब अंबेदकर को एक घोघा पर बैठकर उसे हांकते हुये दिखाया गया है तथा उनके सामने देश की जनता को इंतजार करते हुये खडा दिखाया गया है । अंबेदकर के पिछे जवाहर लाल नेहरु चांबुक लेकर अंबेदकर पर बरसा रहे हैं ताकि अंबेदकर संविधान निर्माण की रफ़्तार बढायें । यह कार्टून संविधान बनने में लग गये तीन वर्ष   की देर पर एक व्यंग हैं । आज जब अंबेदकरवादियों ने इसका विरोध किया तब यह प्रसांगिक हो गया । सरक...

बिहार के अखबार जो नहीं छापतें

बिहार के अखबार  जो नहीं छापतें नीचे मैं चार समाचार दे रहा हूं जिनपे बिहार के अखबारों ने कोई तव्वजो नही दी। आप स्वंय बतायें क्या ये समाचार महत्वपूर्ण नहीं थें ? बिहार में अखबारों की निष्पक्षता समाप्त हो चुकी है। प्रभात खबर के हरवंश दलाल बन गये हैं वहीं क्कू श्रीवास्तव हिंदुस्तान को अपनी नौकरी का डर है । रह गई दैनिक जागरण की बात तो वह कभी अखबार की श्रेणी में हीं नहीं माना गया , पेड न्यूज की कालिख आज भी उसमे उपर लगी हुई है । नीचे कुछ समाचार दे रहे हैं , इन समाचारों को सुर्खियों में होना चाहिये था लेकिन अधिकांश अखबारों ने इन्हें प्रकाशित हीं नही किया । यूपी में बिहार की बसें जप्त नीतीश की रैली यूपी के बलिया जिले में थी , उसके पहले शरद याद व ने एक सभा बस्ती में की थी , जहां भीड नही जूट पाई थी । शरद यादव को भाषण दिये बगैर वापस लौटना पदा था . नीतीश को भी भय था कि कहीं वैसा हीं हाल उनकी सभा का न हो इसलिये बिहार सरकार की बसों से श्रोता भर भर कर ले जाये जाये गये थें। जहां सभा थी , वहां के आसपास के क्षेत्रों से भी बसो द्वारा भीड इकठ्ठी की जा रही थी । उन बसों को जप्त कर लिया गया लेक...

हमने मजबूर कहारों पर ग़ज़ल लिखी है

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बिहार में पत्रकारिता जगत का शायद हीं कोई व्यक्ति हो जो विनायक विजेता को न जानता हो । अंतर हो सकता है समर्थक और विरोधी होने का । पत्रकारिता जगत का एक जाना पहचाना चेहरा , प्यार से मांगो तो जान हाजिर , लडोगे तो फ़ैसला तिहाड में । कभी – कभी उनसे मुलाकात हो जाया करती है । विजेता जी के साथ कभी आप ध्यान की अवस्था में बैठें , मजा आयेगा । उनकी  तुकबंदी कहें , कविता कहें या विचार ।   ।वह है “ सबसे बडा कौन “   । लिखते समय भी सबसे बडा कौन की पंक्तिया याद आ रही है और मन्द मन्द  मुसकुरा रहा हूं । एक गजल इन्होने  फ़ेसबुक पर पोस्ट की है । यहां उसे दे रहा हूं । आप तो हल छोड   के मंगरु उठाये हथियार के दर्द को बयां कर रहे हैं विजेता सर जी । मदन तिवारी   हमने गाँव के बेचारों पर ग़ज़ल लिखी है आपने सागर के उफनते हुए यौवन को सराहा हमने तो शांत किनारों पर ग़ज़ल लिखी है खा रहे नोच कर इंसान की बोटी जो आपने उन गुनाहगारों पर ग़ज़ल लिखी है जिनकी आदत है हँसीं जिस्म का सौदा करना आपने उनके इशारों पर ग़ज़ल लिखी है आपने उगते हुए सूरज को नमस्कार किया हमने ढलते...

प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश के खिलाफ़ मुकदमा

प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश के खिलाफ़ मुकदमा सन्मार्ग के खिलाफ़ भी केस इस खबर का इसलिये भी विशेष महत्व है कि भडास फ़ोर मीडिया ने अपने पोर्टल पर इसको प्रकाशित किया है । मैं स्वंय भी लिखता था भडास पर लेकिन एक दो बार प्रभात खबर के खिलाफ़ और अन्ना के खिलाफ़ लिखे हुये लेख वहां नहीं प्रकाशित हुये , मेरे जैसे व्यक्ति के लिये यह एक संकेत था । समझ गया , हो ्सकता है यशवंत की मजबूरी रही हो । प्रभात खबर अच्छा विग्याप न देता था , कभी – कभी छोटी छोटी बातों को नजरअंदाज करना पडता है । दिल्ली में रहकर न्यूज पोर्टल चलाना आसान काम नही है । सलाह देने वाले सौकडो मिलेंगें माल देनेवाले एक्का दुक्का । खैर देर से सही यशवंत ने समझदारी दिखाई । मैने भडास पर लेख न छपने के बात , प्रभात खबर की चटुकारितावाली पत्रकारिता के खिलाफ़ अपने साइट पर लिखना जारी रखा । अन्ना चौकडी के खिलाफ़ भी सच सामने लाने की मेरी कोशिश रंग लाई । आज लोग समझ गये हैं , अन्ना चौकडी का सच । एक और मित्र हैं वाचस्पति , उन्हें मेरे गर्म तेवर पसंद नहीं आते । अब मैं तो अपना तेवर बदलने से रहा । इन सबके बीच कुमार सौवीर समझदार हैं । यशवंत के ...

नीतीश हैं बिहार के अखबारों के संपादक ; पत्रकारो ने बताया

मीडिया का भ्रष्टाचार : बिहार के संदर्भ में पटना में बिहार टाईम्स कनक्लेव के समापन सत्र में पत्रकारों ने मीडिया के अंदर आइ गिरावट पर रोष और चिंता प्रकट की । इस दौरान बिहारकी मीडिया के संदर्भ में जो बातें उभर कर आई वह शर्मनाक थीं । अधिकांश वक्ताओं ने मीडिया की विश्वसनियता में आई गिरावट पर चिंता व्यक्त की । पत्रकार प्रंजय गुहा ने मीडिया की स्तरहिनता को दर्शाते हुये कहा कि अब मीडिया मिशन नही बल्कि कमीशन के लिये कार्य कर रही है । नारायण दत तिवारी के सेक्स संबंधित न्यूज का हवाला देते हुये खेद जताया कि मीडिया को यह भी अहसास नही है कि उसके कार्यक्रम का   परिवार सहित देखने वाले लोगों पर क्या असर पडेगा । आउटलुक हिंदी के संपादक नीलाभ मिश्रा ने टीवी की रेटिंग में की जा रही धोखाधडी यानी अपने फ़ायदे के लिये हेरफ़ेर का मामला उठाया . सबसे ज्यादा तार्किक ढंग से प्रंजय गुहा ने मीडिया के सामने आ रही चुनौतियों को प्रस्तुत किया । उन्होनें उदाहरण दिया कि कैसे बेनेट कोलमैन एंड कंपनी जिसका प्रकाशन टाइम्स आफ़ ईंडिया और इकोनोमिक टाइम्स है ,   ने भ्रष्टाचार का मार्ग दिखाया । वहीं चुनाव आयोग द्वा...

सम्मेलनों का दौर : श्रमजीवी पत्रकार संघ का सम्मेलन

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लगता है आजकल सेमिनारों का दौर चल रहा है । बिहार के पत्रकार मित्र भुनेशवर गये हुये हैं । वहां पत्रकारों का सम्मेलन है । श्रमजीवी पत्रकार संघ का सातवां राष्ट्रीय सम्मेलन । इस सम्मेलन का उदघाटन उडीसा के राज्यपाल भंडारी ने किया । पतना के पत्रकार विनायक विजेता ने अपने वाल पर उदघातन समारोह की एक तस्वीर पोस्ट की है , उसे हम यहां दे रहे हैं ।इधर बोधगया के संबोधी रिसोर्ट में भारतीय संसदीय संस्थान एवं इन्टरनेशनल काउंसिल आन मैनेजमेंट आफ़ पोपुलेशन प्रोग्राम , मलेशिया के द्वरा एक परिचर्चा का आयोजन किया गया था । उदय नारायन चौधरी विधानसभा अध्यक्ष ने उदघाटन   किया । बिहार के राजनेताओं में रामचन्द्र पूर्वे , राजनिति प्रसाद , राज्यसभा सदस्य , किरन घई , रामेश्वर चौरसिया ने भी इस परिचर्चा में भाग लिया । दो दिन का यह कार्यक्रम था । एक पैनल में मैं भी था । उस पैनल के अध्यक्ष थें डा० डी के सारंगी पूर्व स्वास्थय मंत्री । मोडरेटर थें दीपक गुप्ता , पटना के प्रभात खबर के रजनीश उपाध्याय और इंडियन एक्सप्रेस की  सहायक   संपादक रह चुकी पामेला फिलिपोज । परिचर्चा का विषय था गर्भवती महिलाओं का ...

हिंदुस्‍तान फर्जीवाड़ा : पुलिस ने मुंगेर कार्यालय से शुरू की जांच

हिंदुस्‍तान फर्जीवाड़ा : पुलिस ने मुंगेर कार्यालय से शुरू की जांच मुंगेर। देश के चर्चित दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन/संस्करण और अवैध प्रकाशन से केन्द्र और राज्य सरकारों को विज्ञापन मद में दो सौ करोड़ का फर्जीवाड़ा करने के सनसनीखेज मामले में मुंगेर की कोतवाली पुलिस ने विधिवत जांच शुरू कर दिया है। इस मुकदमे के जांचकर्ता सब इंस्पेक्टर अमरजीत झा दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर मुख्यालय के बेकापुर स्थित कार्यालय में दलबल के साथ पहुंचे और अखबार के निबंधन से संबंधित कागजात की जानकारी मांगी। अमरजीत झा ने इस संवाददाता को बताया कि वे दर्ज प्राथमिकी, कोतवाली थाना कांड संख्या-445/2011 के अनुसंधान के सिलसिले में दैनिक हिन्दुस्तान कार्यालय जांच के लिए गए थे। इस बीच, पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि जांचकर्ता ने दैनिक हिन्दुस्तान कार्यालय के मुंगेर प्रभारी से प्राथमिकी के संबंध में जिन-जिन बिन्दुओं पर जानकारी मांगी, प्रभारी ने कोई भी जानकारी नहीं दी। पुलिस जांच अधिकारी झा ने घटनास्थल का मुआयना सम्पन्न किया। स्मरणीय है कि मुंगेर के सामाजिक कार्यकर्ता मंटू शर्मा दैनिक हिंदुस्‍तान के इस फर्जीवा...

बिहार के गया जिला में भी हैं फ़र्जी पत्रकार और प्रकाशित हो रहे हैं गैरकानूनी ढंग से अखबार

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बिहार के गया जिला में भी हैं फ़र्जी पत्रकार और प्रकाशित हो रहे हैं गैरकानूनी ढंग से अखबार प्रभात खबर और अबतक बिहार दोनो का प्रकाशन है अपराध अबतक बिहार में छपता है नेट से चुराया हुआ समाचार फ़र्जी पत्रकारों के कारण मीडिया की प्रतिष्ठा दाव पर लग गई है । ऐसा नही है कि इस तरह के पत्रकार स्वंय फ़र्जी बने हैं , इनको फ़र्जी बनाने में मीडिया घरानों का भी हाथ है । इलेक्ट्रोनिक चैनलों के स्ट्रिंगर उसी श्रेणी में आते हैं , इन्हें कोई पहचान पत्र निर्गत नही होता है , उसी प्रकार दैनिक जागरण से लेकर प्रभात खबर तक और हिंदुस्तान , आज , राष्ट्रीय सहारा भी अपने पत्रकारों को पहचान पत्र निर्गत नही करता है । बिहार के गया जिले में तो पत्रकारिता कमाई का अच्छा जरिया बन गया है । स्टेशन की बीट देखने वालों को कम से दस हजार की उपरी आमदनी होती है । केबुल न्यूज चैनल भी चलता है जो पूर्णत: गैर कानूनी है । गया से प्रभात खबर का प्रकाशन बिना निबंधन कराये शुरु हुआ है । एक और सांध्य दैनिक एक केबुल न्यूज चैनल चलानेवाले बिमलेंदु ने निकाला " अबतक बिहार " के नाम से मेरे जैसा आदमी भी फ़स गया बिमलेंदु के फ़रेब में । बना द...

क्या यशवंत 'चोर' है?

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 हा हा हा आखिर वही हुआ जिसका अंदेशा था । जगमोहन फ़ुटेला जी का लेख पढे , उन्होनें सुशील गंगवार द्वारा भदास के यशवंत के खिलाफ़ लिखे गये लेख का जवाब दिया है । कल हो सकता है यशवंत का भी जवाब आये । एक दार्शनिक भाव वाला जवाब । मुझे तो मजा आ रहा है । हा हा हा । क्या यशवंत 'चोर' है? at 2:00 AM Posted by Sushil Gangwar - 09167618866 जगमोहन फुटेला- ' भड़ास ' पे खुद उसके मालिक ने अपने बारे में एक लेख छापा है सुशील गंगवार का...शीर्षक है , " भड़ास 4 मीडिया का पेड न्‍यूज का काला कारोबार". इस लेख में गंगवार ने एक सवाल उठाया है. कहा है कि विज्ञापन जब नहीं है तो वेबसाईट चलती कैसे है ? वे लिखते हैं कि यशवंत पेड़ न्यूज़ और दलाली का धंधा करते हैं. मैं न यशवंत के साथ हूँ , न खिलाफ़. इस लिए भी कि मैं उन्हें आज तक कभी नहीं मिला. हाँ , एक बार उन्हें वायस आफ इंडिया के दफ्तर में देखा ज़रूर है. उन के बारे में बातें बहुत सुनी हैं. सो , सुशील जो भी कह रहे हैं मैं उसकी तस्दीक कर पाने की हालत में नहीं हूँ. मुझे ये भी नहीं पता कि दोनों में अब बिगड़ी क्यों है. लेकिन एक बात सच है...

नीतीश के छह साल के शासन का सच

बिहार: बदहाल या खुशहाल ? यह नीतीश के छह साल की रिपोर्ट कार्ड का सच है बिहार में जद(यू)-भाजपा गठबंधन सरकार के छह साल पूरे होने पर राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने शासनकाल के दूसरे दौर के पहले साल का ' रिपोर्ट कार्ड ' जारी किया है. ( यह बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर की रिपोर्ट पर आधारित है । ) इसे ' न्याय के साथ विकास यात्रा के छह वर्ष ' नाम दिया गया है. इसमें नीतीश कुमार ने लिखा है - '' पिछले छह वर्षों में बिहार में शांति , सदभाव , और क़ानून का राज क़ायम हुआ है. '' अब सवाल उठता है कि जब सरकार की तरफ़ से न्याय , विकास , समाज में शांति-सदभाव और क़ानून का राज भी क़ायम हो गया है , तो फिर बताइए ऐसा अमन-चैन धरती पर और कहाँ है ? चूँकि भाजपा भी यहाँ सत्ता-साझीदार है , इसलिए नीतीश द्वारा घोषित ' सुशासन ' को सरकारी दल के लोग अति उत्साह में ' राम राज ' जैसा बताने लगें तो आश्चर्य कैसा ? लेकिन विरोधाभास ये है कि इसी रिपोर्ट कार्ड में मुख्यमंत्री को ये स्वीकारना पड़ा है कि '' बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच...