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अभिव्यक्ति की आजादी और गालियाँ

"Miss a meal if you have to, but don't miss a book." --Jim Rohn अभिव्यक्ति की आजादी का बहुत सरल अर्थ है । " आप जो कहना चाहते है उसे कहने की आजादी " freedom to express what you wish " दिक्कत यह है कि इस छोटे से शब्द का दायरा बहुत बड़ा है जिसके कारण अक्सर गलतफहमियां पैदा हो जाती है जिनका परिणाम कभी कभी बहुत ही भयानक होता है । हमने देखा मोहम्मद के कार्टून के लिए charlie hebdo शार्ली एब्दो । इतेफाक से जब वह  घटना हो रही थी मै  एक विदेशी ब्लॉग पर था । तत्क्षण न्यूज फ्लैश हुआ । पहले से विवाद था। हमले हुए थे । मुकदमा चला था। शायद दुनिया का पहला व्यक्ति था मै जिसने तुरंत कार्टून को अपने फेसबुक वाल पर लोड किया , घटना के खिलाफ पोस्ट लिखा।   इस्लामिक संगठनो के संयुक्त राष्ट्र संघ वाला ग्रुप organisation of islamic countries. पूर्व से ही ईशनिंदा को अंतराष्ट्रीय स्तर पर लागू करवाने की योजना बनाता रहा और प्रस्ताव भी संयुक्त राष्ट्र संघ में ला चुका था जो पारित नहीं हुआ ।  यह इस्लामिक राष्ट्रों के संगठन के 57 सदस्य है इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ में इन्हें ignore करना संभव न...

गया की जिलाधिकारी बंदना प्रेयसी अयोग्य है

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  गया की जिलाधिकारी बंदना प्रेयसी अयोग्य है मैं यह प्रयास करता हूं कि किसी पर व्यक्तिगत आक्षेप तबतक न करुं जबतक उसका कार्य आम जनता के लिये दिक्क्त का कारण न बनें । बंदना प्रेयसी नाम है गया   की कलक्टर   का। इनका फ़ोन नंबर सार्वजनिक हैं लेकिन ये फ़ोन कभी नहीं उठाती । दिक्कत इनके आइ ए एस कैडर होने में है । इनको इतना अधिकार मिला हुआ है कि ये सोचते हैं , हम शासन करने के लिये हैं और बाकी लोग यानी आम जनता इनकी गुलाम है । आइ ए एस जब यूपीएससी की तैयारी करते हैं तब इनकी हालत देखने लायक होती है । ये इतने गंदे हैं कि जेनेयू के उन पाठयक्र्मों में दाखिला लेते हैं जहां पढने की जरुरत नही है और मुफ़्त में आवास सहित सारी सुबिधा बहुत हीं कम पेमेंट पर उपलब्ध होती है । नियमत: यह गलत है । जे एन यू भी उसके कैंपस में रहकर आइ ए एस की तैयारी करनेवालों छात्रों को रेस्टिकेट करता है । इसी तरह का एक कोर्स है लैंगुएज जिसमें ये दाखिला लेते हैं । नानी याद आ जाती है इन्हें तैयारी के समय । लेकिन जैसे हीं ये लोग कलक्टर बन जाते हैं शोषण शुरु कर देते हैं । इनके शोषण का तरीका बडा अदभुत होता है । जनता ...

बियाडा घोटाला पर सरकार की लीपापोती

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बियाडा घोटाला पर सरकार की लीपापोती सुने घुस देनेवाले का बयान बियाडा घोटाला की जांच सीबीआई के बिना संभव नही बियाडा जमीन आवंटन घोटाला के संबंध में विपक्ष के हंगामे के बाद नीतीश कुमार ने प्रधान सचिव अनुप मुखर्जी को जांच का जिम्मा दिया था , सी के मिश्रा , बियाडा ने आज प्रेस कांफ़्रेस करके क्लीन चीट देते हुये कहा कि जमीन आवंटन में किसी प्रकार का घोटाला नही हुआ है औा आवंटन की सारी प्रक्रिया सही है । बिहार के गया जिले में भी बियाडा की तकरीबन ३१ एकड जमीन थी । जमीन गया – डोभी रोड पर स्थित है । जहां जमीन है , वहां जमीन डेढ करोड रुपए एकड की दर पर भी उपलब्ध नही है परन्तु उक्त जमीन मात्र ६ से दस लाख रुपए एकड के दर पे आवंटित की गई है । उक्त जमीन का आवंटन अगर विग्यापन निकालकर किया जाता तो बडी –बडी कंपनियां वहां अपना उध्योग लगाती और रोजगार के अवसर पैदा होते तथा जमीन की उचित किमत भी मिलती । उक्त ३१ एकड जमीन में से एक आदमी अवधेश कुमार को शिक्षण संस्थान खोलने के लिये चार कंपनियों के नाम पर पांच लाख चौवालिस हजार पांच सौ वर्गफ़िट जमीन का आवंटन कर दिया गया । बिहार में शिक्षा को उद्योग घोषित नही किया गया है । ...