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मुख्यमंत्री कर्जदार, बेटा करोड के पार

मुख्यमंत्री कर्जदार , बेटा करोड के पार ज़ी हां यह गाथा है विनाशपुरुष सारी सारी , प्रभात खबर के विकासवाली खबरों के विकास पुरुष नीतीश कुमार की । कभी आपने सडकों के किनारे हाथ की सफ़ाई दिखानेवाले जादूगरों का तमाशा देखा है न , बस वही तमाशा है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का। हर रोज एक नया कानून , हर हफ़्ते - दस दिन पर भ्रष्टाचार के नाम पर एकाध चूजों को गिरफ़्तार करनेवाली खबर । एक और ड्रामा है संपति घोषित करने का। बिहार के मंत्री अपनी संपति की घोषणा करते हैं और एक तरह से अपने आप को बचा लेते हैं । नब्बे प्रतिशत मंत्रियों ने गलत घोषणा की है । आज जिस भी मंत्री के बारे में नीतीश दावा करें कि उसके द्वारा की गई घोषणा सही है , मैं चौबीस   घंटे के अंदर बता दुंगा कि उस मंत्री ने कितना काला धन छुपाया है । लेकिन मंत्री को क्या दोष दिया जाय जब मुख्यमंत्री हीं भ्रष्ट हो। बिहार के मुख्यमंत्री ने भी अपनी संपति की घोषणा की है । मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार वे कर्जदार हैं। घोषित संपति में १९ दिसंबर तक का ब्योरा है । नीतीश कुमार के पास नगद : ४६ , ९७४ रु   , पुत्र निशांत के पास : मात्र ...

प्रभात खबर के हरवंश जी नीतीश के प्रचार प्रमुख

प्रभात खबर को बहुत पहले से मैं नीतीश कुमार का अखबार कहता आ रहा हूं , आज भडास फ़ार मीडिया पर एक लेख हरवंश जी का छपा है । उस लेख पर पाठकों की प्रतिक्रिया किसी भी पत्रकार के लिये शर्मिंदगी की बात है लेकिन हरवंश जी को असर नही पडेगा , कारण है २५ सालललललललललललल से ज्यादा दिनो से पत्रकारिता करने का अहम । खैर आप पढें , हमारे हरवंश जी की गाथा । खगड़िया के बहाने बिहार : गुंडा कांड से विकास कथा तक Details Category: इवेंट , पावर-पुलिस , न्यूज-व्यूज , चर्चा-चिट्ठी... Published on Tuesday, 03 January 2012 06:32 Written by हरिवंश कुछ जगहें जेहन में बस जाती हैं. उनकी स्मृति आते ही इतिहास , अतीत और पुरानी घटनाएं सजीव हो उठती हैं. वर्तमान को टटोलती , खंगालती और आंकती. कुछ इस तरह बिहार का खगड़िया जिला मेरी स्मृति में है. धर्मयुग , मुंबई ( 80 के दशक के पूर्वार्ध) , रविवार , कोलकाता ( 90 के दशक के उत्तरार्ध) और फ़िर प्रभात खबर (रांची , 2000 के बाद)...

प्रभात खबर का असर : कोहरा छटा

प्रभात खबर का असर : कोहरा छटा प्रभात खबर बिहार से निकलनेवाला अखबार है । अभी कुछेक माह पहले इसने गया से अपना प्रकाशन शुरु किया है । खबरें तो हर अखबार में छपती हैं लेकिन उनका असर तभी होता है जब प्रभात खबर में छपे । प्रभात खबर भी अपने कर्तव्य का पालन   करता है , सुबह सुबह बताता है कि उसके अखबार में छ्पी खबर का क्या असर हुआ । आपको बताता हूं कुछ   खबरों का असर ; जनाना अस्पताल में पांच गर्भवती महिलायें भर्ती , बच्चे होने में हो रही है देर : इसका असर पडा , दुसरे दिन प्रभात खबर ने छापा ; खबरों का असर : जनाना अस्पताल में भर्ती महिलाओं को बच्चे पैदा हुयें , हमने बच्चे पैदा होने में हो रही देर की खबर छापी थी , हमारी खबर का असर है कि आज सुबह सभी महिलाओं को बच्चे पैदा हुयें । प्रभात खबर की खबर का असर बडा जबर्दस्त होता है , जनाना अस्पताल में कुतियों ने भी खबर छपने के बाद बच्चे पैदा किये । फ़ाल्गू में पानी नही , कैसे करेंगें पिंडदान : प्रभात खबर ने छापा खबर का असर : हमने दस दिन पहले फ़ाल्गू में पानी नही होने की खबर छापी थी , आज फ़ाल्गू में पानी भर गया , यह है हमारी ख...