जान अब्राहम कानून से उपर है
जान अब्राहम कानून से उपर है आज टीवी का हाई वोल्टेज ड्रामा था फ़िल्म अभिनेता जान अब्राहम की अपील का सेशन जज के यहां से खारिज होना , समर्पण के लिये न्यायालय द्वारा वक्त न देना , पुलिस द्वारा हिरासत मे ले लेना और भगवान के रुप में मुंबई उच्च न्यायालय के एक जज आर सी चव्हाण द्वारा अपील मंजूर करते हुये जमानत देना । सभी टीवी चैनल इस समाचार को बार – बार दिखा रहे थें , मुझे लगता है आर सी चव्हाण उच्च न्यायालय के जज ने भी शायद इसे देखा होगा । उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई या नही , वही बता सकते हैं । नियमत : जब अपील खारिज कर दी जाती है और समर्पण के लिये समय नही दिया जाता है तो वैसी स्थिति में बगैर जेल जाये तथा सरेंडर प्रमाणपत्र लिये , उच्चतम न्यायालय में सुनवाई नही होती । जिस तरह फ़टाफ़ट सबकुछ हो गया , वह न्यायालय के लिये शर्मिंदगी का कारण है , एक भी दुसरा उदाहरण जो किसी आम आदमी से संबंधित हो , न्यायालय नही दे सकता है । देश की न्यायापालिका पक्षपातपूर्ण काम करती है , यह अनेको मामलों में देखने को आया है । वस्तुत : न्यायपालिका तानाशाह की तरह कार्य कर रही है । सामान्यत : कम सजा वाले मामले में अपील क...