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जान अब्राहम कानून से उपर है

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जान अब्राहम कानून से उपर है आज टीवी का हाई वोल्टेज ड्रामा था फ़िल्म अभिनेता जान अब्राहम की अपील का सेशन जज के यहां से खारिज होना , समर्पण के लिये न्यायालय द्वारा वक्त न देना , पुलिस द्वारा हिरासत मे ले लेना और भगवान के रुप में मुंबई उच्च न्यायालय के एक जज आर सी चव्हाण द्वारा अपील मंजूर करते हुये जमानत देना । सभी टीवी चैनल इस समाचार को बार – बार दिखा रहे थें , मुझे लगता है आर सी चव्हाण उच्च न्यायालय के जज ने भी शायद इसे देखा होगा । उन्हें शर्मिंदगी महसूस हुई या नही , वही बता सकते हैं । नियमत : जब अपील खारिज कर दी जाती है और समर्पण के लिये समय नही दिया जाता है तो वैसी स्थिति में बगैर जेल जाये तथा सरेंडर प्रमाणपत्र लिये , उच्चतम न्यायालय में सुनवाई नही होती । जिस तरह फ़टाफ़ट सबकुछ हो गया , वह न्यायालय के लिये शर्मिंदगी का कारण है , एक भी दुसरा उदाहरण जो किसी आम आदमी से संबंधित हो , न्यायालय नही दे सकता है । देश की न्यायापालिका पक्षपातपूर्ण काम करती है , यह अनेको मामलों में देखने को आया है । वस्तुत : न्यायपालिका तानाशाह की तरह कार्य कर रही है । सामान्यत : कम सजा वाले मामले में अपील क...

टूजी फ़ैसला : जज साहब यह क्या किया ?

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टूजी फ़ैसला : जज साहब यह क्या किया ? आज टूजी मामले में एक अहम फ़ैसला सुनाते हुये ,   उच्चतम न्यायालय के दो जज जी एस सिंघवी एवं ए के गांगुली ने १२२ लायसेंस रद्द करने तथा स्पेक्ट्रम की पुन : निलामी का आदेश पास किया। न्यायालय ने सरकार की नीति पहले आओ पहले पाओ को खारिज करते हुये यह आदेश पारित किया । बिहार मीडिया ने कल दिनांक एक फ़रवरी के लेख “ तू चोर ,तू चोर : टूजी मामला “ में इस बात को जाहिर कर दिया था कि न्यायालय में , भी भ्रष्टाचार की   बजाय आवंटन की नीति   पर बहस हो रही है जो एक खतरनाक संकेत है और इससे भ्रष्टाचार के असली दोषियों को फ़ायदा होगा , आज न्यायालय के फ़ैसले ने वही किया । न्यायमूर्ति कहलाने वाले जज महोदय नें आवंटन की नीति को हीं गलत ठहरा दिया और १२२ लायसेंस को रद्द कर दिया । रद्द होने   वाले लायसेंस में वे कंपनियां भी शामिल हैं , जिनके खिलाफ़ सीबीआई जांच के दौरान कोई गडबडी नही पाई गई थी । यह कैसा फ़ैसला है ? क्या इसे     “ अंधी नगरी चौपट जज ( राजा )   , टके सेर भाजी , टके सेर खाजा “ वाला फ़ैसला नहीं कहेंगें ? जो कंपनियां दोषी...

तू चोर , तू चोर : टूजी मामला

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तू चोर , तू चोर : टूजी मामला टूजी मामले में कैग की रिपोर्ट आने के बाद एक तूफ़ान सा आ गया । एक लाख छहतर हजार करोड का घोटाला , हरेक की जुबां पर यही चर्चा । आर्थिक समीक्षक से लेकर सभी मीडिया घराने एक स्वर में चिल्लाने लगें। आजादी के बाद का सबसे बडा घोटाला करार दिया गया । क्या वाकई ऐसा कुछ था ? क्या एक लाख छहतर करोड का कोई घोटाला हुआ था ? कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने जब कहा कि यह एक काल्पनिक रकम है तो उन्हें गालियां मिली । प्रश्न यह था कि इस   राशी का निर्धारण कैसे हुआ ? कैग ने स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया में अनियमितता पाई । आवंटन पक्षपातपूर्ण था। लेकिन यह देखना कैग के कार्यक्षेत्र में नही आता , उसे सिर्फ़ आर्थिक मामले देखने   का अधिकार है । । कैग ने निष्कर्ष निकाला की सरकार की पहले आओ , पहले पाओ नीति की जगह पर अगर स्पेक्ट्रम की निलामी हुई रहती तो एक लाख छहतर करोड रुपये की आय होती , यानी मामला आवंटन की नीति पर आ टिका। पहले आओ , पहले पाओ की नीति सही थी , आम जनता के हित में थी । निलामी एक प्रकार से कर है। चाहे बालु के घाट की हो या शराब के ठेके की । निलामी से सरकार क...