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यशवंत सिंह के समर्थन में बाराबंकी में बैठक

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यशवंत सिंह के समर्थन में बाराबंकी में बैठक अरविंद विद्रोही आज बाराबंकी के पंजाब केशरी कार्यालय में पत्रकारो की एक आवश्यक बैठक संपन्न हुई । बैठक में पिछले दिनो भडास ४ मीडिया के संपादक यशवंत सिंह की फ़र्जी मुकदमों में गिरफ़्तारी पर रोष प्रकट किया गया । उपस्थित पत्रकारो ने उतर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव से यशवंत सिंह की फ़र्जी मुकदमे में गिरफ़्तारी की उच्च स्तरीय जांच तथा एक निर्भीक – बेबाक पत्रकार यशवंत सिंह के साथ आतंकवादियों सरीखा व्यवहार करने वाले नोएडा पुलिस कर्मियों को दण्डित करने की मांग की गई । बैठक में स्वतंत्र पत्रकार अरविंद विद्रोही , मो० अतहर , - पंजाब केशरी , तारिक किदवई - उर्दू आग , प्रदीप सारंग – टीवी १०० , देवेन्द्र नाथ मिश्र   - प्रतिदिन , दीपक निर्भय – यूपी न्यूज , म० असीम किदवई - जन माध्यम , संजय वर्मा , सतीश कश्यप , हर् ‍ देश श्रीवास्तव आदि पत्रकार साथी मौजूद थें । अरविंद विद्रोही जी का फ़ोन नंबर  09919700046 टिप्पणी के साथ अपना ई मेल दे जिस पर हम आपको जवाब दे सकें. our email : biharmedia@yahoo.com, tiwarygaya@gmail.com, tiwariga...

मैं हूं उनके साथ खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़...

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मैं हूं उनके साथ खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़... धीरज भारद्वाज किसी ने मुझसे पूछा , " क्या आपको इंडिया टीवी के संपादक विनोद कापड़ी से कोई निजी दुश्मनी है जो आप उनके खिलाफ़ अपने पोर्टल ' मीडिया दरबार ' पर अभियान चला रहे हैं और अपने साथी पोर्टल ' मीडिया खबर ' के संचालक पुष्कर पुष्प को दोषी ठहरा रहे हैं ?" तो मैं आवाक रह गया। मैंने उन्हें फ़ौरन जवाब दिया कि अगर विनोद कापड़ी और यशवंत के बीच मुझे किसी को चुनना होगा तो मैं बेशक यशवंत को चुनुंगा क्योंकि मैं कोई चोरी करके ' ब्लैकमेल ' होने वाले की जगह ' ब्लैकमेलर ' बनने वाले को ज्यादा पसंद करता हूं , लेकिन इसके लिए पुष्कर , अविनाश या संजय तिवारी जैसे सहयोगियों को दोषी ठहराने की मूर्खता मैं नहीं करूंगा , वो भी ऐसे वक्त पर जब हम सबको एक होने की और भी अधिक जरूरत है। ' मीडिया दरबार ' एक ऐसा मंच था जिसे मैंने ही करीब साल भर की कड़ी मेहनत से खड़ा किया था। उसे मैंने राजस्थान के एक ' बेस्ट वेब डिज़ाइनर ' नामक फर्म से बनवाया था। उस डिज़ाइनर ने बड़ी ही चतुराई से इसे अपने नाम स...

यशवंत को जमानत: हौसला बुलंद है , अपराध नही किया है मैने

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यशवंत को जमानत : हौसला बुलंद है , अपराध नही किया है मैने आज भड़ास 4 मीडिया के संपादक यशवंत सिंह को जमानत मिल गई है. उन्‍हें साक्षी जोशी कापड़ी द्वारा दर्ज कराए गए मामले में कोर्ट ने जमानत दी है. इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी तथा उनकी दूसरी पत्‍नी व आईबीएन 7 की एंकर साक्षी जोशी कापड़ी ने यशवंत के खिलाफ क्रमश: नोएडा के फेज टू तथा सेक्‍टर 49 थाने में अलग अलग मुकदमा दर्ज कराया था. तीस जून की दोपहर दर्ज कराए गए मामले में नोएडा पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए दो घंटे के भीतर ही यशवंत को गिरफ्तार कर लिया था. साक्षी जोशी द्वारा दिए गए शिकायत पर सेक्‍टर 49 की पुलिस ने आईपीसी की धारा 294 तथा 7 सीएलए के तहत मामला दर्ज किया था. बाद में परेशान करने की नीयत से पुलिस ने इसमें दो और धाराएं आईपीसी के तहत 509 तथा 72 आईटी एक्‍ट जोड़ दिया था. पुलिस ने अपनी तरफ से मामले को और ज्‍यादा लटकाने की कोशिश की परन्‍तु माननीय जज अनिल कुमार यादव ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत याचिका खारिज करने की मांग को अस्‍वीकार कर दिया. यशवंत की तरफ से बहस वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता शिखर ठकराल ने की. अब वि...

मैं भारत का गद्दार बनना पसंद करुंगा

मैं भारत का गद्दार बनना पसंद करुंगा भगत सिंह , आजाद जैसे लाखो क्रांतिकारी भारत के गद्दार थें , ये भारत नामक देश के खिलाफ़ नही थें , इनकी लडाई भारत की सरकार से थी । आज भी बहुत सारे लोग हैं जिनके उपर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है , इनकी खिलाफ़त भी देश से नही है , बल्कि देश की सरकार और कानून से है। कोई भी मुल्क जो स्वराज का दावा करता हो , उसे एक भी कानून बनाने के पहले लाख बार सोचना चाहिये , कानून जिसके हित के लिए बनाने की बात है , उसे पसंद है या नही वह कानून । सोशल नेटवर्किंग साईटों पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी का अर्थ समझ में नही आता । जिन सामग्रियों को आपतिजनक मानकर सरकार प्रतिबंध का यह खतरनाक खेल खेल रही है , वह हिंदु धर्म के कुछ देवी देवताओं और इस्लाम धर्म के खिलाफ़ पोस्टिंग है , वहीं कांग्रेस की आलोचना भी। कांग्रेस और भाजपा इन्हीं दो दलों के खिलाफ़ साइटो पर पोस्टिंग मिलेगी , साफ़ जाहिर है कि ये दोनो दल प्रतिबंध का गेम खेल रहे हैं। सोशल साइट्स राजनीतिक परिवर्तन का नया मंच बनकर उभर रहे हैं। पूंजीवाद के खिलाफ़  इन साइट्स पर अधिकांश पोस्टिंग है । लोगो का मन बदल रहा है। सरकार ...

नीतीश के चमचे मंत्री पी के शाही ने अपमानित किया सहारा के पत्रकार को

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नीतीश के चमचे मंत्री पी के शाही ने अपमानित किया सहारा के पत्रकार को पीके शाही ने सहारा को लताड़ा , तमाशबीन बने रहे खबरनवीस पटना : बिहार के मानव संसाधन विकास मंत्री पीके शाही ने पत्रकारों के सामने एक पत्रकार की इज्जत उतार ली। दरअसल हुआ यह कि कल बिहार के कुछ नामी गिरामी शिक्षा बीट वाले पत्रकार बिन बुलाये मेहमान के जैसे शाही जी के शाही दरबार में घुस गये। इस दौरान राज्यपाल सह कुलाधिपति पर अपना गुस्सा निकालने के बाद शाही ने सहारा के प्रतिनिधि को बुलाया और कहा- '' तुमको शर्म नहीं आती है , जो मन में आता है , उसे बेसिर-पैर की खबर बनाकर चला देते हो , सारी हेकड़ी निकल जायेगी , अगर मानहानि का एक केस कर दिया। '' करीब 5 मिनट तक शाही ने शाही अंदाज में उस पत्रकार की आबरू लूटा और वहां अन्य मौजूद खबरनवीस इस बात से खुश थे कि यह डांट उन्हें नहीं लग रही थी। वैसे शाही के गुस्से की वजह यह रही कि सहारा सहित बिहार के तमाम स्थानीय चैनलों ने यह खबर चलाया था कि शाही जी की पत्नी सबसे अमीर पत्नियों में से एक हैं। सहारा के उस पत्रकार का दुर्भाग्य यह रहा कि शाही जी ने यह खबर केवल सहारा चैनल पर ही ...

चैनलों के साथ इंटरनेट को भी पीसीआई के दायरे में लाना चाहते हैं काटजू

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चैनलों के साथ इंटरनेट को भी पीसीआई के दायरे में लाना चाहते हैं काटजू नई दिल्ली। भारतीय प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने नियामक संस्था को और अधिक अधिकार दिए जाने और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और इंटरनेट को भी इसके दायरे में शामिल किए जाने पर जोर दिया है। इसके लिए उन्होंने संसद में एक विधेयक पेश करने का सुझाव दिया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजी एक चिट्ठी में काटजू ने कहा कि कानून की धारा 14 (1) के तहत प्रेस काउंसिल को मिले अधिकार के तहत वह अखबार , न्यूज एजेंसी , एडिटर या पत्रकार की आलोचना या निंदा कर सकती है या चेतावनी दी सकती है। यह चिट्ठी सूचना का अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक हुआ है। इस चिट्ठी में काटजू ने कहा , ' अनुभवों से साफ हुआ है कि सिर्फ चेतावनी , निंदा या आलोचना से सामान्य तौर पर संबंधित अखबार , न्यूज एजेंसी या एडिटर या पत्रकार पर कोई असर नहीं होता और उनमें इसकी अनदेखी करने का भाव रहता है। ' यह बयान   है माननीय काटजू महोदय का । श्रीमान चाहते हैं कि अभिव्यक्ति  के  हर माध्यम पर इनका नियंत्रण हो । इनको यह लगता है कि इंटरनेट पर अगर नियंत्रण...

देश के हर व्यक्ति के फ़ोन काल , एस एम एस , नेट की हो रही है निगरानी

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देश के हर व्यक्ति के फ़ोन काल , एस एम एस , नेट की हो रही है निगरानी घर के अंदर होनेवाली बातचीत की रेकार्डिंग जी हां , यह सच है । पुरी दुनिया में तकरीबन एक सौ से ज्यादा कंपनिया मास स्तर पर हर टेलीफ़ोन काल , एस एम एस का डाटा तैयार कर रहीं हैं। यहांतक की एच   टी टी पी एस के माध्यम से भेजे जा रहे मेल को भी हैक किया जा रहा है । पहले हम http   और https   क्या है और उनमें क्या अंतर है बता देते हैं। http   यानी हायपरटेक्स्ट ट्रांसफ़र प्रोटोकाल यानी नेट के डाटा भेजने का माध्यम । यह टीसीपी ( ट्रांसमिसन कंट्रोल प्रोटोकाल के पोर्ट ८० के माध्यम से डाटा भेजने का कार्य करता है और कोई भी http   का उपयोग कर सकता है परन्तु https   एक सुरक्षित तरीका है जिसमें डाटा को टीसीपी प्रोटोकाल तक भेजने के पहले उसको कोड में बदल दिया जाता है । आप जब किसी साइट पर लोगिन  होते हैं तो वह सुरक्षित होता है एन्क्रिप्सन या पासवर्ड के द्वारा । इसका ट्रांसमिसन प्रोटोकाल ४४३ है। यहां हम तकनीक की बारीकियों में न जाकर  व्यक्ति की निजता पर मडरा रहे  खतरे की चर्चा कर रह...

कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर सेंसरशिप लगाने का प्रस्ताव रखा

कपील सिब्बल ने सोशल मीडिया पर सेंसरशिप लगाने का प्रस्ताव रखा फ़ेसबुक सेसंरशिप के लिये तैयार ट्विटर , यूटयूब और गूगल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में सरकार ने सोशल नेटवर्किंग साइटस पर अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है । दुर्भाग्य यह है कि यह सबकुछ उस व्यक्ति के द्वारा किया जा रहा है जो एक पढा लिखा व्यक्ति है । कपिल सिब्बल को लगता है कि   इस तरह का सेंसरशिप लगाकर वह लोगों को अपनी भवनायें अभिव्यक्त करने से रोक देंगें। अभी किसी भी साइटस पर जाने के लिये नेट की जरुरत है जिसकी सुविधा सर्विस प्रोवाइडर उपलब्ध कराते हैं । लेकिन अब इसके आगे भी नेट का जाल फ़ैल चुका है । आने वाले समय में किसी प्रकार के सर्विस प्रोवाइडर की जरुरत नही होगी । अभी भी साफ़्टवेयर उपलब्ध है लेकिन महंगे हैं। यानी बिना किसी भी कंपनी से नेट कनेक्न्शन   लिये आप नेट का उपयोग कर सकते हैं। दुसरी बात नेट का जाल बहुत व्यापक है । गूगल या फ़ेसबुक भारत में व्यावसाय ...