विद्वता के लिए एक चश्मा, खुरदुरी छोटे छोटे बाल वाली दाढ़ी और जे एन यू का टैग । बस आप बन गए फेसबुकिया विद्वान् । उम्र चाहे कुछ भी हो । मैं इस तरह के पोस्ट नहीं करता हूँ परन्तु फेसबुक की एक महिला ने चेतन भगत की सफलता का उदाहरण देते हुए हिंदी साहित्यकारों द्वारा अपनी पुस्तको की बिक्री न होने के लिए बहाने बनाने की आदत पर बहुत ही अच्छा सारगर्भित पोस्ट किया था उक्त पोस्ट पर एक फेसबुकिया विद्वान् टपक पड़े और यह टिपण्णी /कमेन्ट किया """ A kshat seth :: म ाफ़ कीजिये पर चेतन भगत समय की मांग हैं। ये बात सही है कि उन्होंने पाठक वर्ग में नयी ज़मीन तोड़ी है- पर ऐसा मस्तराम और वेद प्रकाश शर्मा भी पहले कर चुके हैं। अंतर बस ये हैं कि श्रीमान भगत सभ्यता की पतली सी चादर अपनी लेखनी को उड़ाकर रखतेहैं व नतीजतन आप बैठक में खुलकर यह कह सकते हैं कि आप चेतन भगत पढ़ते हैं। इस पतली सी चादर के नीचे एक बाज़ारवाद और पूंजीवाद का समर्थक मस्तराम बैठा है जो लड़की को चीज़ से ज़्यादा कुछ नहीं समझता है । A kshat s eth :: S aket bhai, Mujhe Mastram se koi dqqat nahi hai. In fact I love him for being upfront about...