अन्ना के कैंप में फ़ैली निराशा ; अथक प्रयास के बाद भी नही जुटी भीड
अन्ना के कैंप में फ़ैली निराशा ; अथक प्रयास के बाद भी नही जुटी भीड अन्ना चौकडी का मीडिया मैनेजमेंट पिछली बार दमदार था । मीडिया को कैसे मैनेज किया जाता जाता है , इसकी जानकारी रखनेवालों को पता है , भारत का मीडिया नियंत्रित होता है विदेश से । अमूमन इस तरह के आंदोलन का प्रबंध पर्दे के पिछे रहकर कार्य करनेवाली ताकते करती हैं। पिछली बार अगस्त में कुछ ज्यादा उत्साहित होकर विदेशी ताकते जिनमें मुख्य सीआईए है ने मीडिया को मैनेज किया था और अच्छी भीड अन्ना के आंदोलन में लगी थी । भीड का स्वभाव चुंबक की तरह होता है । भीड को देखकर भीड जुटती है । सीआईए और उसके कार्यों को कवर देनेवाली संस्था फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन के बारे में सबको पता चल जाने के बाद इसबार उन्होनें खुद को अन्ना के आंदोलन से दुर रहकर आंकलन करने का निश्चय किया । आर एस एस ने भी पिछली बार आंदोलन को समर्थन दिया था और पूरे देश में उसके कार्यकर्ता आंदोलन के पक्ष में सडकों पर उतरे ...