नई धारा रॉयटर्स रेजीडेंसी में कवि कृष्ण कल्पित -शिवांगी गोयल कांड पर एक निष्पक्ष रिपोर्ट
इस घटना के दोनों पात्रों की विचारधारा एक ही है,
फॉरेन फ़ंडिंग इन जैसे के लिये नई धारा जैसा मंच के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है
प्रगतिशीलता का मायने इनके लिये वामपंथ है
शरीर की पवित्रता इनके लिये कोई मायने नही रखती
इस घटना में भी दोनों के बीच समझौता होने का कारण वही लिबर्लिज्म है , फिर भी गलत हुआ इसलिये आवाज उठा रहा हूँ अन्यथा शिवांगी गोयल से भी कोई सहानुभूति नही है ।
नई धारा रॉयटर्स रेजीडेंसी में कवि #krishnakalpit के द्वारा की गई निंदनीय,दंडनीय अपराध पर एक रिपोर्ट 👇👇
बात सिर्फ एक शिवांगी गोयल की नहीं है हजारों शिवांगी गोयलो की है जिन्होंने कोई शिकायत कभी दर्ज नहीं की होगी किसी ने सामाजिक प्रतिष्ठा के भय से, किसी ने अपने भविष्य के भय से , न जाने अब तक कितनी लड़कियों के साथ , कवयित्रियों के साथ , लेखिकाओं के साथ, कहानीकारों के साथ यह व्यक्ति कृष्ण कल्पित इस तरह की हरकत कर चुका होगा इसकी जांच तो होनी चाहिए ।
आप सबको खुर्शीद अनवर की घटना याद होगी वह अपने परिवार से अलग एक फ्लैट में रहता था, एक एनजीओ चलाता था उसके फ्लैट में अक्सर युवा लड़के लड़कियों की पार्टी होती थी रातभर पार्टी चलती थी शराब और नशे का कोई आलम नहीं था इत्तेफाक से 1 दिन नॉर्थ स्टेट की एक लड़की भी उसे पार्टी में शामिल हुई जैसा अक्सर उसकी पार्टियों में होता था शराब का दौर चला , उस लड़की ने भी पी होगी , वह सो गई बाकी कुछ युवा जो खुर्शीद के एनजीओ से जुड़े थे वही भी वही रुक गए और खुर्शीद अनवर तो वहां रहता ही था रात में वह व्यक्ति उसे लड़की के बेडरूम में गया और उस लड़की के साथ बलात्कार किया जब यह घटना चर्चा में आई तो जितने उसके समर्थक थे खुर्शीद अनवर के उसके एनजीओ से जुड़े हुए जो युवा-युवतियां थी सभी उसके बचाव में खड़े हो गए वहां भी यही सवाल पैदा था कि आखिर पीड़िता क्यों नहीं सामने आती अंत में जब पीडिता सामने आई पुलिस ने एफआईआर दर्ज की तो खुर्शीद अनवर ने फ्लैट से कूद कर आत्महत्या करली उसके एनजीओ से जुड़े हुए कुछ युवा-युवतियां जिन्होंने रेप के साक्ष्य को मिटाने का कार्य किया था जैसे उस लड़की के बिस्तर की चादर को धो दिया था उस लड़की के कपड़े थे जो छोड़कर रह गई थी उन वस्त्रों को नष्ट किया था , अब इन पर भी गिरफ्तारी का खतरा तो मंडराने लगा खैर किसी तरह यह अपनी जान बचा पाएं।
शायर ,कवि,साहित्यकार, पेंटर्स की वास्तविक जिंदगी वैसी होती नहीं जैसा यह दिखलाते हैं इनकी कलई लज्जा की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी खोली थी कितने लिजलिजे , गलीच लोग होते हैं ।
इस मामले में शिवांगी गोयल ने सिर्फ दो शर्त रखी हालांकि उन्हें एफआईआर दर्ज करना चाहिए था इस तरह के लोग इन शर्तों को मान लेते हैं उन्हें लगता है कि चलो किसी तरह पीछा छूटा लेकिन वह नए शिकार ढूंढते रहते हैं आज शिवांगी गोयल अगर शांत बैठ जाती हैं तो निश्चित रूप से या कृष्ण कल्पित फिर किसी को शिकार बनाएगा कम से काम खुद के लिए नहीं तो आने वाले लड़कियों के लिए कवयित्रियों के लिए , लेखिकाओं के लिए शिवांगी गोयल को एफआईआर दर्ज करना चाहिए इससे न सिर्फ शिवांगी गोयल को न्याय मिलेगा बल्कि पूर्व में कृष्ण कल्पित ने जिन जिन लड़कियों के साथ और महिलाओं के साथ इस तरह की हरकत की होगी उन सभी को भी न्याय मिलेगा याद होगा एक कास्ट काऊच करके फिल्मी दुनिया का एक मामला चला था की कैसे जो नई लड़कियां सिनेमा की दुनिया में अपना स्थान बनाने के लिए आती हैं तो उन्हें समझौता करना पड़ता है ठीक वही स्थिति साहित्य की दुनिया की भी है यह दुनिया भी बहुत गंदी है और इसके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए क्योंकि शिवांगी गोयल के साथ यह घटना हुई है तो उन्हें निश्चित रूप से एफआईआर दर्ज करना चाहिये।
शिवांगी गोयल ने अपने फेसबुक अकाउंट पर जो लिखा है वह यहां दे रहा हूँ, शिवांगी द्वारा की गई कंप्लेन और नई धारा का इस संगीन घटना को दबाने वाले जवाब भी दे रहा हूँ जो खुद शिवांगी गोयल ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया है ।
Shivangi Goel
मुझे जो कहना है वो कहने के लिए अलग से एक लम्बी पोस्ट लगेगी (लिखूँगी) , फ़िलहाल ये कि आवाज़ उठाई गई थी तभी आप तक पहुँची है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या एक मंच तक सीमित नहीं है। मैं मानता हूँ कि साहित्य और प्रगतिशीलता का मुखौटा कई बार सत्ता और शोषण को छुपा देता है। हम हर बार नैतिकता को निजी पसंद बताकर अपराध को हल्का नहीं बना सकते। शराब, सहमति या विचारधारा कोई ढाल नहीं बनती। समाज को ऐसे लोगों से सवाल पूछने चाहिए और पीड़ित के साथ खड़ा होना चाहिए।
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